W3Schools
Advertisement

‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ में भारतीय कारीगरों की भूमिका महत्वपूर्ण : खंडेलवाल

10:32 PM Sep 28, 2026 IST | Sumant Chaudhary
‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ में भारतीय कारीगरों की भूमिका महत्वपूर्ण   खंडेलवाल
Delhi News

Delhi News : भारत मंडपम में शुरू हुए तीन दिवसीय दिल्ली ज्वेलरी एंड जेम फेयर में भारतीय आभूषण उद्योग की बदलती तस्वीर देखने को मिल रही है। देशभर से आए ज्वेलर्स, डिजाइनर्स और आभूषण कारोबारियों ने यहां पारंपरिक भारतीय आभूषणों से लेकर आधुनिक डिजाइन और नई तकनीक से तैयार गहनों की बड़ी रेंज प्रदर्शित की है। खास बात यह है कि सोने की बढ़ती कीमतों के बीच बाजार में हल्के वजन के आभूषणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। रोजाना पहनने वाले गहनों के साथ शादी और विशेष अवसरों के लिए हल्के और आकर्षक डिजाइन भी प्रदर्शनी में प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं।

Advertisement

प्रदर्शनी का उद्घाटन लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र देश के निर्यात और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 के निर्यात लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उद्योग को निवेश, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देना होगा। ‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की यात्रा को आगे बढ़ाने में भारतीय कारीगरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके कौशल को पहचानने और उसे और विकसित करने से भारतीय आभूषणों की गुणवत्ता तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी।

Advertisement

100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर नजर

Advertisement

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (भारत) के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ सोने और आभूषण उद्योग के लिए भी बड़े अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही दुनिया के प्रमुख स्वर्ण आभूषण बाजारों में शामिल है और ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रोडमैप इस क्षेत्र की विकास संभावनाओं को रेखांकित करता है।

उन्होंने बताया कि अगले पांच से सात वर्षों में भारत की सोने की खपत का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खदानों से आने की संभावना है। इसके साथ ही आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे घरेलू उत्पादन, खनन, डिजाइन, कारीगरी और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

एफटीए से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहुंच

नेशनल ज्वेलरी एंड जेमस्टोन काउंसिल ऑफ इंडिया (एनजेजीसीआई) के अध्यक्ष प्रमोद डेरावाला ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और सरकारी पहलों के माध्यम से भारतीय आभूषण उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल रही है। इससे देश में विनिर्माण और निर्यात, दोनों को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि भारतीय आभूषण उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। उनके मुताबिक 2026 की दूसरी तिमाही में वैश्विक स्वर्ण आभूषण मांग में भारत की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत रही। हालांकि, सोने की ऊंची कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है और ग्राहक हल्के वजन तथा मूल्य-सचेत विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 27.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हाल में घोषित 2040 रोडमैप के तहत इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

650 से ज्यादा प्रदर्शक, 1.5 लाख से अधिक डिजाइन

भारत मंडपम में आयोजित इस मेले के हॉल नंबर एक से पांच तक 650 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। यहां 3,000 से ज्यादा ब्रांड और करीब 1.5 लाख डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इनमें पारंपरिक भारतीय आभूषणों के साथ समकालीन और आधुनिक डिजाइन भी शामिल हैं। इससे ग्राहकों और कारोबारियों को बदलती उपभोक्ता पसंद और आभूषण उद्योग में आ रहे बदलावों को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।

प्रदर्शनी में चांदी के आभूषणों के लिए विशेष मंडप बनाया गया है, जहां चांदी के गहनों के साथ देवी-देवताओं की मूर्तियों और अन्य उत्पादों की बड़ी रेंज प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा आभूषण निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और नई तकनीक के लिए अलग बड़ा हॉल बनाया गया है।

महंगे सोने ने बदली खरीदारी की पसंद

मेले में हल्के वजन के आभूषणों पर विशेष जोर दिखाई दे रहा है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ग्राहक ऐसे डिजाइन पसंद कर रहे हैं, जिनमें कम वजन में आकर्षक लुक मिल सके। यही वजह है कि रोजमर्रा में पहने जाने वाले हल्के गहनों के साथ शादी और विशेष अवसरों के लिए भी कम वजन वाले डिजाइन कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बन रहे हैं।

प्रदर्शनी में एक ओर जहां भारतीय कारीगरों की पारंपरिक कला देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक मशीनों और तकनीक के इस्तेमाल से आभूषण निर्माण में हो रहे बदलाव भी नजर आ रहे हैं। इस तरह दिल्ली ज्वेलरी एंड जेम फेयर न केवल आभूषणों की प्रदर्शनी बनकर सामने आया है, बल्कि यह भारतीय ज्वेलरी बाजार में बदलती पसंद, नई तकनीक और वैश्विक निर्यात की बढ़ती संभावनाओं की तस्वीर भी पेश कर रहा है।

Advertisement
Author Image

Sumant Chaudhary

View all posts

Advertisement
Advertisement
×