अब घनी आबादी वाले व पुराने क्षेत्रों में नए स्कूल खोलने की राह में आ रही बाधाएं होंगी दूर
Delhi Government : दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने, मान्यता बढ़ाने और स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए तय न्यूनतम जमीन की अनिवार्यता हटा दी है। इस निर्णय से विशेषकर घनी आबादी वाले और पुराने शहरी क्षेत्रों में नए स्कूल खोलने व मौजूदा स्कूलों का विस्तार करने की राह में आ रही बड़ी बाधाएं दूर हो गई हैं। इस निर्णय को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
इसको लेकर शिक्षा निदेशालय ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अब दिल्ली में किसी नए निजी स्कूल को मान्यता देने, पहले से मान्यता प्राप्त स्कूल की मान्यता बढ़ाने या स्कूल का लेवल अपग्रेड करने के लिए शिक्षा निदेशालय न्यूनतम जमीन की कोई तय शर्त नहीं रखेगा। आदेश में आगे कहा है कि स्कूलों को एफिलिएशन के लिए संबंधित बोर्ड जैसे सीबीएसई या अन्य बोर्ड के नियमों का पालन करना होगा। जमीन से जुड़े नियम भी संबंधित बोर्ड के मानकों के अनुसार तय होंगे। शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि मान्यता मिलने के बावजूद स्कूलों को दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियमों, बच्चों के निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून समेत अन्य जरूरी नियमों का पालन करना होगा।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब दिल्ली के मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए भूमि के आकार को लेकर कोई कड़े और एकसमान पेचीदगियों वाले नियम लागू नहीं होंगे, जिन्हें पूरा करना कई प्रबंधन समितियों के लिए कठिन हो रही थी।
यहां बता दें कि पिछले एक दशक से शिक्षा क्षेत्र में भूमि की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। दिल्ली जैसे महानगर में जहां जमीन के दाम अधिक हैं और भूखंडों का आकार सीमित है, वहां बड़े भूखंडों की अनिवार्यता के चलते कई बेहतरीन शिक्षण संस्थान औपचारिक मान्यता के दायरे में आने से वंचित रह जाते थे। इस नई नीति के तहत अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों के समग्र विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, बाल अधिकार संरक्षण, सुरक्षा मानकों, खेलकूद के बुनियादी साधनों और आरटीई अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का पालन करना स्कूलों के लिए अनिवार्य बना रहेगा।
शिक्षा निदेशालय के इस आदेश की कॉपी उपराज्यपाल के प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव, शिक्षा मंत्री के सचिव, मुख्य सचिव, शिक्षा प्रधान सचिव तथा सभी जिला उप-शिक्षा निदेशकों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। साथ ही, निदेशालय की आईटी शाखा को निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश को तत्काल विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि सभी संबंधित संस्थान और आम जनता इसकी जानकारी प्राप्त कर सकें।
यह निर्णय दिल्ली की भौगोलिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक व्यावहारिक कदम है। इससे न केवल अनाधिकृत या संघर्षरत स्कूलों को पारदर्शी व्यवस्था में आने का मौका मिलेगा, बल्कि शिक्षा के अधिकार के तहत बेहतर शैक्षणिक माहौल सृजित करने में भी मदद मिलेगी।

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