हर तीसरे भारतीय को फैटी लिवर का खतरा, पेट की बीमारी को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
AIIMS News : पेट की तकलीफ, गैस, आंतों की गड़बड़ी या लगातार वजन कम होने जैसे लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। देश में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) और लिवर संबंधी बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती लक्षणों पर ही जांच और इलाज शुरू करना जरूरी है। विश्व स्तर पर लगभग हर तीसरे व्यक्ति में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल या लिवर संबंधी बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं।
वहीं करीब हर दूसरा व्यक्ति हेलिकोबैक्टर पायलोरी (एच. पायलोरी) संक्रमण से प्रभावित है। एम्स दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हुयूमन न्यूट्रिशन विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. प्रमोद गर्ग के मुताबिक फैटी लिवर अब सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हो गया है। एम्स के नेतृत्व में किए गए व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में सामने आया कि 38.6 प्रतिशत भारतीय वयस्क और 35.4 प्रतिशत भारतीय बच्चे फैटी लिवर से प्रभावित हैं। इसका सीधा संबंध डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी मेटाबोलिक बीमारियों से है।
कम उम्र में बढ़ रहा कोलोरेक्टल कैंसर
एम्स दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं ह्यूमन न्यूट्रिशन विभाग के अध्यक्ष एवं स्थानीय आयोजन समिति, डब्ल्यूसीओजी 2026 डॉ. शालीमार ने कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई है। भारत में 2022 में पुरुषों में इसके 40,430 और महिलाओं में 24,433 नए मामले दर्ज किए गए। खास बात यह है कि कम उम्र के वयस्कों में भी इसके मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। मल में खून आना, आंतों की आदतों में लगातार बदलाव और बिना वजह वजन कम होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
एम्स के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया ने कहा कि भारत में समस्या विशेषज्ञों या तकनीक की कमी से ज्यादा लक्षणों को गंभीरता से न लेने और स्वास्थ्य की उपेक्षा करने की है। उन्होंने कहा कि यदि कोई लक्षण दो से तीन सप्ताह से अधिक बना रहता है तो उसकी जांच करानी चाहिए।
पहली बार भारत में जुटेंगे दुनिया भर के विशेषज्ञ
इन बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत पहली बार वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी की मेजबानी करने जा रहा है। सम्मेलन 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के विशेषज्ञ डायग्नोस्टिक्स, एंडोस्कोपी, उपचार, गट माइक्रोबायोम और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन की थीम “ट्रांसफोर्मिंग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ प्रीजर्व नेचर” रखी गई है। इस अवसर पर जीआई विभाग के डॉ. विनीत आहूजा भी शामिल हुए।

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