विश्व हृदय दिवस पर गंगा राम में प्रिवेंटिव कार्डियक हेल्थ कैंप का आयोजन
World Heart Day : दिल की बीमारी के लक्षण सामने आने का इंतजार करने के बजाय समय रहते इसके जोखिमों की पहचान करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विश्व हृदय दिवस के अवसर पर सर गंगा राम अस्पताल में रविवार को व्यापक प्रिवेंटिव कार्डियक हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। अस्पताल के कार्डियोलॉजी और सीटी स्कैन विभाग की ओर से आयोजित इस शिविर में आसपास की कॉलोनियों के करीब 120 लोगों ने पंजीकरण कराया।
इस दौरान लोगों की नि:शुल्क हृदय संबंधी जांच की गई और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों ने परामर्श दिया। शिविर में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कविता त्यागी, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. आशीष जैन और डॉ. सुशांत वट्टल के अलावा प्रिवेंटिव हेल्थ की निदेशक डॉ. सोनिया रावत तथा वरिष्ठ स्टाफ फिजिशियन डॉ. नूर फातिमा वारिस ने मरीजों की जांच और परामर्श किया। इस मौके पर धर्मवीरा हार्ट सेंटर के चेयरमैन और सर गंगा राम अस्पताल ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. जे.पी.एस. सावनी ने कहा कि हृदय रोग के जोखिम कारकों की समय रहते पहचान और उचित हस्तक्षेप से हृदय संबंधी बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी का मतलब केवल लक्षणों का इलाज करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र हृदय संबंधी जोखिम को समझना है। ऐसे शिविर लोगों तक बचाव का संदेश पहुंचाने और उन्हें अपने हृदय स्वास्थ्य के प्रति सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद करते हैं। वहीं, एम्स के प्रोफेसर एमेरिटस और कार्डियक साइंसेज के सलाहकार डॉ. एस.सी. मनचंदा ने कहा कि हृदय रोग अचानक विकसित नहीं होता। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिस्लिपिडेमिया, मोटापा और धूम्रपान जैसे जोखिम कारक कई वर्षों तक बिना स्पष्ट लक्षणों के मौजूद रह सकते हैं और बाद में गंभीर हृदय संबंधी घटना का कारण बन सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य की नियमित जांच, जोखिम की समय रहते पहचान और उचित उपचार को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
अस्पताल के सीटी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. अनुराग यादव ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य क्लिनिकल जांच को आधुनिक कार्डियक इमेजिंग तकनीक के साथ जोड़ना था। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य हर व्यक्ति की अनावश्यक जांच करना नहीं, बल्कि चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर उन लोगों की पहचान करना है जिन्हें आगे की जांच और समय रहते बचाव संबंधी हस्तक्षेप की जरूरत हो सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य हर व्यक्ति की अनावश्यक जांच करना नहीं, बल्कि चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर उन लोगों की पहचान करना है जिन्हें आगे की जांच और समय रहते बचाव संबंधी हस्तक्षेप की जरूरत हो सकती है। इस पहल की परिकल्पना डॉ. अनुराग यादव ने डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. किशन रावत, डॉ. राजीव मल्होत्रा, डॉ. स्वप्निल शेठ, डॉ. तान्या चंद्रा, डॉ. प्रियंका गुप्ता और डॉ. ईशा पासरे के साथ मिलकर की थी।
विशेषज्ञों ने लोगों के सवालों के दिए जवाब
कैंप के दौरान प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी को लेकर एक इंटरैक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें डॉ. जे.पी.एस. सावनी, डॉ. एस.सी. मनचंदा, डॉ. सौमित्र रावत (चेयरमैन, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं ऑनरेरी ट्रेजरर, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, एसजीआरएच), डॉ. सीमा भार्गव (चेयरपर्सन, बायोकेमिस्ट्री विभाग) और डॉ. टी.बी.एस. बक्सी (सलाहकार, इमेजिंग विभाग) ने हृदय रोग से बचाव और समय रहते जांच के महत्व पर अपने विचार रखे।

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