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दिल्ली हिंसा : कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या के मामले में गिरफ्तार एक शख्स की जमानत अर्जी की खारिज

दिल्ली की एक कोर्ट ने फरवरी में उत्तर पूर्व दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में गिरफ्तार एक शख्स की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
दिल्ली हिंसा : कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या के मामले में गिरफ्तार एक शख्स की जमानत अर्जी की खारिज
दिल्ली की एक कोर्ट ने फरवरी में उत्तर पूर्व दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में गिरफ्तार एक शख्स की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उसे और अन्य लोगों को निलंबित आप पार्षद ताहिर हुसैन द्वारा कथित तौर पर सांप्रदायिक आधार पर उकसाया गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने शोएब आलम की जमानत अर्जी खारिज कर दी और कहा कि प्रथमदृष्टया स्पष्ट है कि वह गैरकानूनी तरीके से जमा हुई भीड़ का हिस्सा था जो शर्मा की जघन्य तरीके से पिटाई के लिए जिम्मेदारी थी जिससे बाद में उनकी मौत हो गयी।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अनेक गवाहों के बयानों से जाहिर है कि आवेदक (आलम) और अन्य लोगों को मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन द्वारा सांप्रदायिक आधार पर उकसाया गया था।’’

कोर्ट ने कहा कि सरकारी अभियोजक की दलीलों में यह बात पुख्ता तरीके से कही गयी है कि इस स्तर पर पर्याप्त सामग्री है जिससे आलम की साफतौर पर उस ‘दंगाई भीड़’ के हिस्से के तौर पर पहचान होती है जो कथित तौर पर आगजनी, लूटपाट, सरकारी और निजी संपत्ति की तोड़फोड़, सांप्रदायिक नारेबाजी और दूसरे समुदाय के लोगों पर हमलों में शामिल थी।

हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि आदेश में जो भी कहा गया है उसे मामले के अंतिम गुण-दोषों पर व्यक्त कोई राय नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि मामला अभी संज्ञान के पूर्व स्तर पर है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस से सुनवाई के दौरान आलम के वकील ने अदालत से कहा कि उसे पेशेवर दुश्मनी की वजह से गवाह शमशाद प्रधान द्वारा इस मामले में गलत तरह से फंसाया गया है।

विशेष सरकारी अभियोजक मनोज चौधरी ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामले में दर्ज गवाहों के बयानों के सावधानीपूर्वक किये गये विश्लेषण से साफ तौर पर साबित होता है कि आलम कथित रूप से दंगाई भीड़ का हिस्सा था जो आगजनी, लूटपाट और सरकारी एवं निजी संपत्ति को आग के हवाले करने में शामिल थी।
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