राज्यसभा में उठी राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के लिए संवेदनशील नजरिया अपनाने की मांग

03:39 PM Dec 10, 2019 | Kaushik Sharma
पर्यटन के क्षेत्र में वृद्धि होने की वजह से राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों पर दबाव बढ़ने का दावा करते हुए राज्यसभा में मंगलवार को एक मनोनीत सदस्य ने कहा कि इन स्मारकों का पांच साल में रखरखाव सुनिश्वित किया जाना चाहिए। मनोनीत सदस्य शंभाजी छत्रपति ने राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों से जुड़ा मुद्दा शून्यकाल के दौरान उठाया। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में वृद्धि होने की वजह से इन स्मारकों पर भी दबाव बढ़ रहा है। 

छत्रपति ने कहा ‘‘स्मारकों के रखरखाव के लिए बजट तो बढ़ाया गया लेकिन स्मारकों की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इन स्मारकों का पांच साल में रखरखाव सुनिश्वित किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि स्मारकों में कर्मचारियों की भी कमी है जिससे इनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। एक अन्य मनोनीत सदस्य राकेश सिन्हा ने बिहार राज्य में पटना के समीप राजगीर, वैशाली और उमरार में बौद्ध काल के दौरान तीन धम्म सभाओं का आयोजन होने का जिक्र करते हुए कहा कि इस सर्किट में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए ग्रंथालय एवं संग्रहालय बनाया जाना चाहिए। 

कर्मचारियों के रिक्त पदों में शीघ्र भर्ती की मांग करते हुए छत्रपति ने कहा कि अनुसंधान एवं क्षेत्र संबंधी कार्य पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के लिए संवेदनशील नजरिया अपनाना चाहिए। शून्यकाल में ही सपा के रामगोपाल यादव ने वित्त पोषित कालेजों के अध्यापकों की पेंशन की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले पेंशन सेवा अवधि के आधार पर तय की जाती थी लेकिन 2005 में इसे बंद कर मूल वेतन से कटौती की व्यवस्था अपना ली गई। 

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यादव ने कहा कि पेंशन के मूल वेतन से कटौती तो की जाती है लेकिन यह नहीं बताया जाता कि कितनी राशि कट रही है, यह कहां जमा की जा रही है और इसका निवेश कहां किया जा रहा है। सपा सदस्य ने कहा ‘‘खबर है कि यह राशि जिन 169 कंपनियों में लगाई गई वह कंपनियां अब दिवालिया होने की कगार पर हैं।’’ उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्राध्यापकों के आंदोलित होने का जिक्र करते हुए मांग की कि उनकी पेंशन व्यवस्था दुरुस्त की जाए, उन्हें रसीद एवं पास बुक दी जाए तथा सबसे पहले, उनकी अनिश्चित भविष्य की चिंता दूर करते हुए आश्वासन दिया जाए कि उनका पैसा सुरक्षित है। 

टीआरएस सदस्य बी लिंगैया यादव ने तेलंगाना से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि 13वें वित्त आयोग की सिफारिश पर राज्य को केंद्र की ओर से 2217 करोड़ रुपये की राशि दी जानी थी जो अब तक नहीं दी गई। उन्होंने यह राशि तथा अन्य मदों की लंबित राशियां राज्य को शीघ्र जारी किए जाने की मांग की। भाजपा के डी पी वत्स ने शून्यकाल के दौरान मांग की कि सशस्त्र बलों के बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों का दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें वैश्विक रैंकिंग मिल सके। 

कांग्रेस के प्रो एम वी राजीव गौड़ा ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग (केएसबीएल) तथा डीएचएफएल में कथित जालसाजी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कथित जालसाजी की जांच के लिए में कई कदम उठाए जा रहे हैं और सरकार को नियामकों के साथ मिल कर, समस्या का हल निकालने का प्रयास करना चाहिए। अन्नाद्रमुक सदस्य एन गोकुल कृष्णन ने कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने संबंधी मुद्दा उठाया वहीं भाजपा के अजय प्रताप सिंह ने ललितपुर सिंगरौली रेल मांग का शीघ्र निर्माण किए जाने की मांग की। 

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