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अग्निपथ योजना में बदलाव

04:55 AM Jul 07, 2026 IST | Aditya Chopra
अग्निपथ योजना में बदलाव

सूर्य करेगा अगवानी फिर चांद नजर उतारेगा,
हर बालक देश की रक्षा हेतु देखो अब हुंकारेगा।
सर पर होगा कफन हमारे हाथ कलावा धारेगा,
धरा हर पुत्र बनकर अग्निवीर अग्निपथ चलेगा।
कांधे पर बंदूक हमारे माथे केसर त्रिकुंड सजेगा,
सीमा प्रहरी सीना तान चलेगा शत्रु दिल कांपेगा।
देश वीर जब हुंकारेगा पर्वत भी शीश झुकाएगा,
धरा हर पुत्र बनकर अग्निवीर अग्निपथ चलेगा।
देश के अग्निवीर अब किसी कवि की उपरोक्त पंक्तियों को चरितार्थ कर रहे हैं। अग्नि का अर्थ होता है आग और वीर का अर्थ होता है योद्धा। जो जोश से भरपूर तथा किसी भी स्थिति में हार न मानने वाला योद्धा। अग्निवीरों के लिए अब एक अच्छी पहल यह हुई है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने अग्निवीरों को ज्यादा संख्या में स्थायी रूप से रखने की मांग की है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सेना के पास अनुभवी जवानों की संख्या बढ़े ताकि युद्ध या किसी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में उनकी सेवाएं ली जा सकें।
भारतीय सशस्त्र बलों ने पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर से अहम सीख ली है। पाकिस्तान के खिलाफ आपरेशन सिंदूर के दौरान अग्निवीरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। कई मौकों पर ऐसे अग्निवीरों जिन्हें अलग-अलग इलाकों में काम करने और कई सैन्य अभ्यासों का अनुभव था, उन्होंने हालात का ज्यादा तेजी और प्रभावी तरीके से सामना किया। इसी अनुभव को देखते हुए सेना अब अधिक अग्निवीरों को सेवा में बनाए रखने की जरूरत महसूस कर रही है। अब सेना और भारतीय वायु सेना 4 साल की ट्रेनिंग पूरी करने वाले अग्निवीरों की स्थायी भर्ती 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की योजना बना रही है। जबकि नौसेना अग्निवीरों की भर्ती 75 प्रतिशत करने की पहल करने का प्रयास करेगी। रक्षा बलों में अब तक ट्रेनिंग पूरी करने वाले अग्निवीरों की 25 प्रतिशत भर्ती का ही प्रावधान है। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों ने 2023 की शुरूआत में अपना प्रशिक्षण शुरू किया। अग्निवीरों के पहले बैच इस साल के अंत में अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। जब केन्द्र सरकार ने यह योजना शुरू की थी तब इसकी काफी आलोचना की गई थी और यह सवाल उठाया जा रहा था कि 4 वर्ष बाद केवल 25 प्रतिशत भर्ती की जाएगी तो 75 प्रतिशत अग्निवीर कहां जाएंगे। उनके आगे घर परिवार की जिम्मेदारियां होंगी तब वे नौकरी की तलाश में परेशान रहेंगे। तब केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों ने अग्निवीरों को नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया था।
भारतीय सेना हमारे देश की वह शक्ति है जो भारत की सीमाओं की रक्षा करती है। समूचा राष्ट्र इसलिए चैन की नींद सोता है, क्योंकि सीमाओं पर सेना के जवान प्रहरी बनकर खड़े होते हैं। यह केवल एक सैन्य संगठन नहीं बल्कि हर भारतीय के गर्व और सम्मान का प्रतीक है। युवा वर्ग को सैनिक प्रशिक्षण मिले और वह देश की सेवा में जुड़े रहें। युवा वर्ग सैन्य अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहें यह अग्निवीर योजना का मुख्य उद्देश्य है। अग्निवीरों ने प्रशिक्षण के दौरान भी अपनी शहादतें दीं। भारतीय सेना का मानना है कि हर साल सेना में तय संख्या में जवान सेवािनवृत्त होते हैं। ऐसे में अगर कम संख्या में अग्निवीरों को भर्ती किया गया तो आने वाले समय में सेना में जवानों की कमी हो जाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने बड़ी संख्या में नई टेक्नोलॉजी, मॉडर्न प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक हथियारों की खरीद शुरू की है। ऐसे में इन सिस्टम को चलाने वाले जवानों को पहले से ज्यादा समय तक विशेष प्रशिक्षण देने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि वे इनका पूरा अनुभव हासिल कर सकें। यह जरूरत खासतौर पर नौसेना के उन नाविकों और वायुसेना व थलसेना के उन जवानों के लिए अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्हें अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों और हथियार प्रणालियों के संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है। अगर अधिक संख्या में अग्निवीरों को सेवा में रखा जाता है तो तीनों सेनाओं में जवानों की औसत उम्र युवा बनी रहेगी। इसके साथ ही सेना के पास पर्याप्त संख्या में अनुभवी सैनिक भी उपलब्ध रहेंगे। इससे युवाओं और अनुभव के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा। इसके अलावा, इसके पीछे कुछ अन्य कारण भी हैं। अधिकारियों का मानना है कि सैनिकों का लंबा कार्यकाल उन्हें अपने साथियों के साथ बेहतर तालमेल और भरोसा बनाने का मौका देता है। कठिन परिस्थितियों, चुनौतीपूर्ण तैनाती और मुश्किल दौर को साथ मिलकर झेलने से जवानों के बीच आपसी समझ और टीम भावना भी मजबूत होती है।
अग्निपथ योजना के तहत सैनिकों, नौसैनिकों और वायु सैनिकों का प्रशिक्षण चल रहा है। सभी रेजिमेंटल केन्द्रों में अकेले सेना में लगभग 70 हजार अग्निवीर ट्रेनिंग ले रहे हैं। अगले प्रशिक्षण वर्ष में सेना में अग्निवीरों की भर्ती बढ़ाने के लिए लगभग 90 हजार रिक्तियां बढ़ाने की उम्मीद है। पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कुछ समय पहले कहा था कि अग्निपथ योजना को सेना में बड़ा मानव संसाधन सुधार माना जाना चाहिए। सेना को अधिक युवा, ऊर्जावान, अनुशासित और भविष्य की चुनौतियों के ​लिए तैयार करना है तो अग्निवीर भारतीय सेना में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। भारतीय सेना की मांग के अनुरूप अग्निवीर योजना में बदलाव एक बहुत बड़ा कदम होगा और इससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और सम्मान भी। नए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी सेना के आधुनिकीकरण आैर प्रौद्योगिकी आधारित क्षमता और सैन्य बलों को बढ़ाने की योजना पर बल दिया है।

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Aditya Chopra

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