W3Schools "खींचो सेल्फी जीतो इनाम"
For the best experience, open
https://m.punjabkesari.com
on your mobile browser.
Advertisement

मोदी का हिन्द प्रशांत मिशन

01:26 AM Jul 09, 2026 IST | Aditya Chopra
मोदी का हिन्द प्रशांत मिशन
मोदी

भारत-इंडोनेशिया संबंध 2 हजार वर्षों से भी गहरे सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक संबंधों पर आधारित हैं। दोनों देश महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी भी हैं, जिनकी समुद्री सीमाएं भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच लगभग 300 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है। इंडोनेशिया की आजादी में भी भारत ने बड़ी भूमिका ​निभाई थी। इंडोनेशिया पहले नीदरलैंड का उपनिवेश था लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने उस पर कब्जा कर ​लिया था।

Advertisement

1945 में जापान की हार के बाद इंडोनेशिया ने स्वयं को आजाद देश घोषित कर दिया था लेकिन नीदरलैंड और अन्य देश मानने को तैयार नहीं थे। जब इंडोनेशिया और डच सेना में भीषण लड़ाई शुरू हुई तो तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक जो शुरूआती जीवन में एक पालयट थे, को इंडोनेशिया के शीर्ष नेतृत्व को बचाकर भारत लाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

Advertisement

तब बीजू पटनायक भारतीय वायुसेना का डेकोटा विमान लेकर इंडोनेशिया पहुंच गए थे और वे ही इंडोनेशिया के नेता सुकर्णो और सुल्तान शहरयार को बचाकर दिल्ली ले आए थे। इंडोनेशिया को 1949 में आजादी ​मिली। दोनों देशों के संबंधों का इतिहास बहुत स्वर्णिम रहा है। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सुकर्णो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों में 20 अहम समझौते हुए। इन समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण डील इंडोनेशिया द्वारा भारत से ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीदने की रही लेकिन समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों देशों का रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबांग बंदरगाह को मिलकर विकसित करने का फैसला अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण रहा।

Advertisement

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ​हिन्द प्रशांत पर अपने ​विजन के अनुरूप कूटनीतिक दांव खेल दिया है। भले ही यह फैसला सिर्फ एक आर्थिक डील दिखाई दे लेकिन वास्तव में यह ​हिन्द महासागर में भारत का बहुत बड़ा मास्टर स्ट्रोक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जकार्ता, ऑकलैंड और मेलबॉर्न यात्रा का उद्देश्य ही हिन्द प्रशांत समुुद्री इलाके के नक्शे को फिर से बनाना है। इससे यहां रहने वाली ताकतों को स्वायत्तता वापिस मिलेगी और यह इलाके की कहानी को सबका साथ और सबका ​विकास पर केन्द्रित करेगा। जिस तरह से चीन हिन्द प्रशांत में अपना दबदबा कायम कर रहा है और अमेरिका शोषण करने वाली या ब्लैकमेलिंग करने वाली मनमानी कर रहा है, उससे मुक्ति पाना बहुत जरूरी है।

भारत सहयोग की एक नई ज्यॉमैट्री की कल्पना करता है जो चीन और अमेरिका द्वारा बनाए गए नियमों पर निर्भर न हो, बल्कि यहां रहने वाले देशों द्वारा खुद बनाई गई हो। साबांग बंदरगाह के जरिये भारत सीधे चीन की सबसे दुखती रग यानि मलक्का स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बढ़ाएगा। सिर्फ यही नहीं इंडोनेिशया के पास ऐसे कई समुद्री चोक प्वायंट्स हैं जहां से दुनिया के कई बड़े देशों की इकोनाॅमी को कंट्रोल किया जा सकता है। साबांग बंदरगाह भारत के पोर्ट ब्लेयर से महज कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन दोनों के बीच बढ़ते गहरे तालमेल के बाद भारत हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों पर अपनी पकड़ को अभूतपूर्व रूप से मजबूत, कर लेगा। भारत और इंडोनेशिया की यह जुगलबंदी इन समुद्री रास्तों के मुहाने पर एक ऐसी मजबूत दीवार की तरह काम करेगी, जिसे लांघ पाना किसी भी दुश्मन नौसेना के लिए मुमकिन नहीं होगा।

इस डील का सबसे बड़ा एंडगेम ये है कि दोनों देश मिलकर पूरे 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही का 'रीयल-टाइम डेटा' यानी पल-पल की खुफिया जानकारी आपस में साझा करेंगे। मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जो हिन्द महासागर को दक्षिणी चीन से जोड़ता है। आंकड़ों की बात करें तो दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। हर साल इस रास्ते से 90,000 से अधिक मालवाहक और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। आर्थिक मूल्य के लिहाज से देखें तो हर साल खरबों डॉलर का सामान इसी रास्ते से दुनिया भर में सप्लाई होता है। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ये रास्ता और भी भयानक है।

दुनिया भर में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रूट से जाता है। हर रोज इस संकरे रास्ते से लगभग 16 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है। सबसे बड़ी बात ये है कि चीन अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मलक्का स्ट्रेट के जरिए मंगाता है। साबांग पोर्ट पर भारत की पहुंच होने के बाद, भारतीय नौसेना चीनी नौसेना के युद्धपोतों और उसके तेल टैंकरों जैसी हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर गिद्ध जैसी नजर रख सकती है। अगर कभी युद्ध या भारी तनाव की स्थिति बनी तो भारत के पास इस चोक प्वाइंट को पूरी तरह ब्लॉक करने की क्षमता होगी जिससे चीन तड़प उठेगा।

इंडोनेशिया द्वारा ब्रह्मोस और अस्त्र मिलाइल की खरीद भी चीन को परेशान करने वाली है। दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इंडोनेशिया के क्रिटिकल ​मिनरल्स क्षेत्र में चीन का भारी निवेश और दबदबा है और इस पर डील चीन को एक तरह से कूटनीतिक जवाब है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इंडोने​शिया की संसद में खड़े होकर चीन को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की नीतियां विस्तारवादी नहीं हैं।

प्रधानमंत्री ने इशारों ही इशारों में पाकिस्तान को भी निशाना बनाया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियातो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में बहुत मजबूती आई है। दोनों देशों का लक्ष्य तकनीकी, सांस्कृतिक और बहुपक्षीय कोशिशों के माध्यम से सहयोग बढ़ाना और हिन्द प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को मजबूत करना है।

Advertisement
Author Image

Aditya Chopra

View all posts

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.

Advertisement
Advertisement
×