छत्तीसगढ़ी परंपरा को सहेजने की सरकार के स्तर पर कोशिशें तेज

रायपुर : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार परंपरागत संस्कृति पर अधिक जोर दे रही है। प्रदेश में छत्तीसगढ़ी पर्व हरेली और तीज के साथ आदिवासी दिवस पर अवकाश की घोषणा पहले ही की गई है। वहीं परंपरागत त्यौहरों का सीएम के स्तर पर शासकीय आयोजन कर संदेश देन की कोशिशें हो रही है।

 छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के तहत कार्तिक माह में सुबह स्नान करने का अपना महत्व है। लंबे समय बाद इस परंपरा को बरकरार रखने की कवायदें भी हुई है। खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजधानी के नदी में तट पर कार्तिक स्नान करने पहुंचे। 

राज्य सरकार ने बीते डेढ़ दशक में भाजपा सरकार के दौरान परंपरागत त्यौहारों की उपेक्षा करने के आरोप लगाए थे। वहीं इसे नए सिरे से पुनर्जीवित कर लोगों में संदेश देने की कवायदें शुरू की। छत्तसगढ़ी संस्कृति से स्थानीय लोगों के साथ नई पीढ़ी को अवगत कराने पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में तीज के साथ पोला पर्व भी धूमधाम से मनाया गया है। वहीं इस बार दीवाली के बाद गांवों में होने वाली गोवर्धन पूजा को शहरों में भी परंपरागत ढंग से मनाने के एिसीएम हाऊस में शुरूआत की गई। कार्तिक माह में सुबह स्नान करने का अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व माना जाता रहा है। 

इधर सरकारी स्तर पर हो रहे प्रयासों की वजह से फिर संस्कृति की महक लौटने लगी है। सरकार का दावा है कि इस मामले में राज्य के पुरखों के सपनों को संजोने का काम किया जा रहा है। खुद सीएम भूपेश बघेल अपने निवास में आयोजन कर लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। 

राज्य में इस बार मनाए गए राज्योत्यव में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के साथ स्थानीय लोक कलाकारों को ही मौका देने की कोशिशें हुई। बीते वर्षों में प्रदेश में बालीवुड कलाकारों को आमंत्रित करने से भी असंतोष की स्थिति बनती रही है।
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