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125 Year Old Gurudwara Kaha Hain: 1870 के दशक की 'सिंह सभा लहर' का प्रतीक था फ़ारूकाबाद का यह 125 साल पुराना गुरुद्वारा, आज मलबे में हुआ तबदील! जानें इतिहास

02:40 PM Jul 02, 2026 IST | Khushi Srivastava
125 year old gurudwara kaha hain  1870 के दशक की  सिंह सभा लहर  का प्रतीक था फ़ारूकाबाद का यह 125 साल पुराना गुरुद्वारा  आज मलबे में हुआ तबदील  जानें इतिहास
125 Year Old Gurudwara Kaha Hain (Source: Social Media)
पाकिस्तान वाले पंजाब प्रांत में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को लेकर इस समय चर्चाएं काफी तेज हैं। दरअसल, वहां के किसी लोकल बिजनेसमैन ने 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिरवा दिया, जिसके बाद से वहां रहने वाले सिख समुदाय के लोग जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां तक की भारत ने भी इस गुरुद्वारे को गिराए जाने की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार 24 जून की रात इस गुरुद्वारे को प्रशासन से जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लिए बिना ही ढहा दिया गया। आइए, जानें गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब का गौरवशाली इतिहास क्या है।

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब का इतिहास

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब का इतिहास (Gurudwara Sri Guru Singh Sabha Sahib History) बहुत ही अनोखा है। यह गुरुद्वारा सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह सिख इतिहास के एक बहुत बड़े आंदोलन (Reform Movement) का प्रतीक भी है। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फ़ारूकाबाद में स्थित है। यह गुरुद्वारा लगभग 125 साल पुराना है।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब (Gurudwara Sri Guru Singh Sabha Sahib in Farooqabad) का इतिहास 'सिंह सभा लहर' आंदोलन से सीधा जुड़ा हुआ है। 1870 के दशक में जब पंजाब में सिखों का राज खत्म हो गया और अंग्रेजों का शासन आया, तब सिख धर्म में कई कुरीतियां आ गई थीं। साथ ही, दूसरे धर्मों के लोग सिखों का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे थे।
सिख धर्म की शुद्धता को वापस लाने, गुरुओं की शिक्षाओं को फैलाने और पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए 'सिंह सभा आंदोलन' शुरू किया गया। इसी आंदोलन के तहत पाकिस्तान वाले पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में गुरुद्वारे और स्कूल बनाए गए। फ़ारूकाबाद का यह गुरुद्वारा भी इसी आंदोलन का एक मुख्य केंद्र था, जहां लोगों को सिख इतिहास और धर्म की सही शिक्षा दी जाती थी।

1947 के विभाजन के बाद का समय

1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तो फ़ारूकाबाद और आस-पास के इलाकों से ज्यादातर सिख परिवार भारत आ गए। सिखों के जाने के बाद यह ऐतिहासिक इमारत खाली हो गई। हालांकि, इसका ऐतिहासिक महत्व हमेशा बना रहा। भारत और दुनिया भर से पाकिस्तान जाने वाले सिख श्रद्धालु इस तरह के ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने जाते हैं।

गुरुद्वारा गिराए जाने पर भारत ने की कड़ी निंदा

Gurudwara Sri Guru Singh Sabha Sahib
Gurudwara Sri Guru Singh Sabha Sahib (Source: Social Media)
हालिया में इस गुरुद्वारे को गिराने की खबर के बाद अब पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में रहने वाले सिख समुदाय में आक्रोश देखा जा रहा है। भारत सरकार ने इस मामले की कड़ी निंदा की है और इस्लामाबाद से कहा कि वह इस मामले की जांच कराए और गुरुद्वारे के टूटे हुए हिस्सों को दोबारा से बनवाया जाए। भारत ने यह भी कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान को अपने देश में रह रहे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए।
यह भी पढ़ें- Pakistan में गुरुद्वारे को तोड़े जाने से मचा विवाद, जानिए 125 साल पुराने इस पवित्र स्थल का इतिहास; भारत ने मांगा जबाव
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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