Mahabharat 5 Villages Names: दिल्ली-NCR से हरियाणा तक, जानिए कहां छिपे हैं महाभारत काल के वे 5 गांव, जिनकी वजह से हुआ था कुरुक्षेत्र का महाविनाश
Mahabharat 5 Villages Names: कहां हैं महाभारत के 5 गांव?
1. व्याघ्रप्रस्थ (Baghpat, Uttar Pradesh)

पांडवों द्वारा मांगा गया पहला गांव था व्याघ्रप्रस्थ, जिसे आज बागपत के नाम से जानते हैं। 'व्याघ्र' का संस्कृत में मतलब बाघ होता है, और माना जाता है कि प्राचीन काल में इस इलाके में बहुत सारे बाघ रहते थे, जिस वजह से इसका यह नाम पड़ा। इस जगह का ऐतिहासिक महत्व बहुत ज्यादा है क्योंकि इसे 'लाक्षागृह' की घटना से जोड़ा जाता है। यह वही जगह है जहां दुर्योधन ने पांडवों को जिंदा जलाने के लिए लाख का महल बनवाया था, लेकिन पांडव एक गुप्त सुरंग के रास्ते सुरक्षित बच निकले थे।
2. स्वर्णप्रस्थ (Sonipat, Haryana)

दूसरा गांव था स्वर्णप्रस्थ, जिसका मतलब होता है 'सोने की जगह'। समय के साथ-साथ इसका नाम बदलकर सोनप्रस्थ और फिर बाद में सोनीपत हो गया। आज के समय में यह हरियाणा का एक बहुत ही विकसित और प्रमुख औद्योगिक शहर है। दिल्ली से बिल्कुल सटे होने के कारण इसका आर्थिक और ऐतिहासिक महत्व आज भी उतना ही मजबूत है जितना महाभारत काल में था।
3. पांडुप्रस्थ (Panipat, Haryana)

तीसरा गांव पांडुप्रस्थ था, जिसे महाराज पांडु के नाम पर बसाया गया माना जाता है। इस जगह को अब पानीपत के नाम से जाना जाता हैं। यह शहर देश की राजधानी नई दिल्ली से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतिहास में पानीपत की तीन बड़ी लड़ाइयों के लिए यह जगह मशहूर है।
4. तिलप्रस्थ (Tilpat, Haryana)

चौथा गांव था तिलप्रस्थ, जिसे आज हरियाणा के फरीदाबाद जिले में तिलपत नाम के कस्बे के रूप में जाना जाता है। ऐतिहासिक नजरिए से यह जगह बेहद खास है क्योंकि यहां की खुदाई में जो सभ्यता के अवशेष मिले हैं, वे महाभारत काल से भी ज्यादा पुराने माने जाते हैं। Krishna 5 Village Demand to Duryodhana में तिलपत को सबसे प्राचीन माना जाता है, जो उस दौर में सीधे इंद्रप्रस्थ राज्य के नियंत्रण में आता था।
5. कुरुक्षेत्र (Haryana)

पुरानी कथाओं के अनुसार, पांचवें गांव के रूप में इंद्रप्रस्थ (Indraprastha Old Fort Delhi) और कुरुक्षेत्र के कुछ हिस्सों को गिना जाता है। कुरुक्षेत्र आज हरियाणा का एक बेहद पवित्र और प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थल है। यही वह पावन भूमि है जहां ज्योतिसर नामक स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का मोह भंग करने के लिए उन्हें भगवद्गीता का अमर उपदेश दिया था। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, कुरुक्षेत्र का यह पूरा धार्मिक और युद्ध क्षेत्र लगभग 48 कोस के दायरे में फैला हुआ था।
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