When will Kali Yuga End: इंसान बनेगा जानवर और 20 साल में होगी मौत! शिवपुराण में छिपा है कलियुग के अंत का खौफनाक सच
संसार के चार युग
- सत्ययुग (Satyug): यह सृष्टि का सबसे पहला समय माना जाता है। इस युग के इंसानों में सिर्फ सच्चाई, ईमानदारी और ऊंचे विचार ही हुआ करते थे। पाप का नामोनिशान तक नहीं था। उस जमाने में इंसानों की उम्र बहुत लंबी होती थी। इस काल के लोग भगवान की भक्ति और आत्मज्ञान में डूबे रहते थे। यह सबसे लंबा चलने वाला युग था, जो इंसानी समय के हिसाब से कुल 17 लाख 28 हजार सालों तक धरती पर रहा।
- त्रेतायुग (Tretayug): सत्ययुग के बाद जब त्रेतायुग आया, तो समाज में अच्छाई और धर्म का स्तर थोड़ा कम हो गया। इस दौर में भगवान को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ और पूजा-पाठ की शुरुआत हुई। यह वही युग है जब भगवान विष्णु ने दुष्टों का संहार करने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रूप में धरती पर जन्म लिया था। यह युग कुल 12 लाख 96 हजार सालों तक चला।
- द्वापरयुग (Dwaparyug): ये संसार का तीसरा युग था। इस युग में धर्म और अच्छाई की भावना घटकर आधी ही रह गई। इंसानों में लालच, मोह-माया, और शक पैदा होने लगा, जिससे समाज में मतभेद शुरू हो गए। यह युग को इतिहास में महाभारत के युद्ध और भगवान श्री कृष्ण के चमत्कारी अवतार के लिए याद किया जाता है। इस युग का समय कुल 8 लाख 64 हजार वर्ष था।
- कलियुग (Kaliyug): यह वही दौर है जिसमें आज हम सब जी रहे हैं। इस युग में अच्छाई, ईमानदारी और धर्म अपने सबसे निचले स्तर पर आ चुके हैं। चारों तरफ अज्ञानता, स्वार्थ, पैसों की अंधी दौड़, लालच और आपस की लड़ाई-झगड़े दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस युग की शुरुआत आज से करीब 5,000 साल पहले हुई थी और इसे पूरा खत्म होने में कुल 4 लाख 32 हजार साल लगेंगे।
कलियुग का अंत कब होगा? (When will Kali Yuga End)
पुराणों में बताई गई जानकारी के अनुसार, कलियुग की पूरी उम्र 4,32,000 साल तय की गई है। जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का महान युद्ध खत्म हुआ था, उसके कुछ समय बाद ही धरती पर कलियुग ने कदम रख दिया था, जिसे बीते हुए लगभग 5,127 वर्ष हो चुके हैं। इसका अर्थ है कि अभी कलियुग को पूरी तरह खत्म होने में अभी लगभग 4,26,873 साल बाकी हैं। आज के कैलेंडर (ईस्वी सन) के हिसाब, कलियुग का पूरी तरह अंत साल 428,899 के आसपास जाकर होगा।
कलियुग का अंत कैसे होगा? (How will Kali Yuga End)
शिवपुराण में कलियुग को लेकर क्या चेतावनियां दी गई हैं? (Shiva Purana Predictions)
शिवपुराण में कलियुग के बारे में बहुत बारीकी से समझाया गया है। यह सारी बातें 'विद्येश्वर संहिता' नाम के हिस्से के पहले और दूसरे अध्याय में पढ़ने को मिलती हैं। वहां महान ज्ञानी सूत जी और अन्य ऋषियों के बीच बातचीत हो रही है, जहां वे आपस में चर्चा करते हुए बताते हैं कि कलियुग कैसे शुरू होगा, इसमें क्या-क्या बदलाव आएंगे और यह कैसे खत्म होगा।
शिवपुराण की भविष्यवाणी कहती है कि जब कलियुग अपने चरम पर होगा, तो इंसान अच्छे काम, पुण्य और परोपकार की बातों को पूरी तरह भूल जाएगा। वह दिन-रात सिर्फ बुरे कामों और गलत आदतों में डूबा रहेगा। लोग सच बोलना छोड़ देंगे सिर्फ झूठ का सहारा लेंगे। दूसरों की पीठ पीछे बुराई करना और चुगली करना लोगों का सबसे पसंदीदा काम बन जाएगा। हर कोई दूसरों के पैसे, जमीन और जायदाद को धोखे से हड़पने की ताक में रहेगा। पुरुषों और महिलाओं का मन अपने जीवनसाथी को छोड़कर दूसरों के प्रति आकर्षित होने लगेगा। लोग बात-बात पर गुस्सा करेंगे, हिंसा और मारपीट पर उतारू हो जाएंगे। सबसे बड़ी बात यह होगी कि लोग भगवान को भूलकर सिर्फ अपने इस चमड़ी के शरीर को ही सब कुछ मान बैठेंगे। इंसान भगवान पर भरोसा करना छोड़ देगा, उसके अंदर से दया का भाव खत्म हो जाएगा और उसकी सोच पशुओं जैसी हिंसक हो जाएगी। घरों में बच्चे अपने ही माता-पिता से झगड़ा करने लगेंगे। जो समाज के मार्गदर्शक हैं, वे भी पैसों के लालच में आकर अपने धर्म से भटक जाएंगे। वे पैसों के लिए वेदों और ज्ञान का सौदा करने लगेंगे। पढ़ाई-लिखाई और विद्या का इस्तेमाल लोग ज्ञान बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अंधाधुंध पैसा कमाने के लिए करेंगे, जिससे समाज में घमंड बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।
समाज के हर वर्ग और जाति का पतन (Shiv Puran Kaliyug)
शिवपुराण के अनुसार, समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारियों को भूल जाएगा। राजा और सैनिक वर्ग जो देश और समाज की रक्षा के लिए बने थे, वे अपनी वीरता और फर्ज छोड़ देंगे। वे कमजोरों की रक्षा करने के बजाय गलत और अनैतिक तरीकों से अपनी जेबें भरने लगेंगे। जो व्यापारी वर्ग है, वह भी ईमानदारी का रास्ता छोड़ देगा। उनका इकलौता मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना होगा, चाहे इसके लिए उन्हें मिलावट करनी पड़े या ग्राहकों के साथ बड़ी धोखाधड़ी करनी पड़े। सेवा करने वाला वर्ग भी अपने मूल कामों को छोड़कर दूसरों की नकल करने लगेगा और केवल बाहरी तड़क-भड़क व झूठे दिखावे में अपनी जिंदगी बर्बाद करेगा। यानी कि समाज का हर एक व्यक्ति अपने असली फर्ज और नैतिकता को पूरी तरह भुला देगा। लोग अंदर से चालाक, मतलबी और कपटी बन जाएंगे। घोर कलयुग के दौर में अगर कोई इंसान बहुत अमीर होगा, तो वह अपने पैसों का इस्तेमाल अच्छे कामों में करने के बजाय ऐश-ओ-आराम और गंदे कामों में उड़ाएगा। वहीं दूसरी तरफ, जो लोग खुद को बहुत बड़ा विद्वान या पढ़ा-लिखा कहेंगे, वे समाज को सही रास्ता दिखाने के बजाय सिर्फ बेकार की बहसों, कुतर्कों और आपस की लड़ाई में उलझे रहेंगे।
कलियुग में महिलाओं और परिवारों की स्थिति कैसी होगी?
शिवपुराण में कलियुग के समय महिलाओं के व्यवहार और उनकी स्थिति को लेकर भी कई बातें बताई गई हैं। ग्रंथ के अनुसार, समाज में पारिवारिक मूल्य और संस्कार बहुत कमजोर हो जाएंगे। महिलाएं अच्छे आचरण और संस्कारों से दूर होने लगेंगी। परिवारों में बिखराव बढ़ेगा, जहां आपसी तालमेल की कमी के कारण जीवनसाथी और सास-ससुर के प्रति आदर-सम्मान की भावना घटने लगेगी। लोग अनुशासन को बंधन मानने लगेंगे, जिससे परिवारों में आपसी मेल जोल टूटने लगेगा।
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