+

अगर किसान केंद्र सरकार की पेशकश पर विचार करें तो बातचीत के रास्ते खुले : नरेंद्र सिंह तोमर

केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा, "भारत सरकार किसानों से पूरी संवेदना के साथ चर्चा करती रही है। आज भी जब उनका कोई मत (विचार) आएगा, तो भारत सरकार हमेशा किसानों के साथ चर्चा करने को तैयार है।"
अगर किसान केंद्र सरकार की पेशकश पर विचार करें तो बातचीत के रास्ते खुले : नरेंद्र सिंह तोमर
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर बैठे महीनों बीत गए हैं, हालांकि अभी तक उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि अगर किसान कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित रखने और इस दौरान संयुक्त समिति के माध्यम से मतभेद सुलझाने की केंद्र की पेशकश पर विचार करने को तैयार हों तो सरकार आंदोलनरत किसानों के साथ बातचीत को तैयार है। 
सरकार और किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों के बीच अभी तक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है और अंतिम बातचीत 22 जनवरी को हुई थी। 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद दोनों पक्षों में बातचीत बंद हो गई। 
केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि सरकार किसानों और किसानी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वह किसानों की आय दोगुनी करने और भारतीय कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है। मंत्री भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) नेता राकेश टिकैत की धमकी के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। 
टिकैत ने चेतावनी दी है कि अगर कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो 40 लाख ट्रैक्टरों के साथ संसद तक मार्च निकाला जाएगा। सरकार किसानों के साथ बातचीत शुरू करने का प्रयास कर रही है या नहीं, इस पर केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा, ‘‘भारत सरकार किसानों से पूरी संवेदना के साथ चर्चा करती रही है। आज भी जब उनका कोई मत (विचार) आएगा, तो भारत सरकार हमेशा किसानों के साथ चर्चा करने को तैयार है।’’ 
गौरतलब है कि किसान केंद्र द्वारा पिछले साल बनए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर नवंबर, 2020 के अंत से ही दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। 


facebook twitter instagram