Adhik Maas Shivratri 2026: 3 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग! अधिक मास की शिवरात्रि पर इस विधि से करें पूजा, दूर होंगे सारे कष्ट
03:05 PM Jun 03, 2026 IST | Khushi Srivastava
Adhik Maas Shivratri 2026: हिंदू धर्म में भोलेनाथ की अराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का खास महत्व बताया गया है। इस दिन शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्त व्रत रखते हैं और उनकी अराधना करता है। इस दिन शिव जी और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि विधान और सच्चे मन से भोलेनाथ की अराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
पुरानी कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती की शादी हुई थी। इसी दिन शिव जी ने पहली बार ‘ज्योतिर्लिंग’ के रूप में दर्शन दिए थे। तभी से हर महीने इस तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाने की शुरुआत हुई।
अधिक मास की मासिक शिवरात्रि का महत्व कई गुणा बढ़ जाता हैं, क्योंकि ये 3 साल में एक बार आती है। आइए जानतें हैं कि Jyesth Maas ki Shivratri Kab Hai, पूजन के लिए शुभ मुहूर्त और विधि क्या है?
Adhik Maas Shivratri 2026: अधिक मासिक शिवरात्रि कब है?

पंचांग के अनुसार, इस बार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 13 जून 2026 को दोपहर 4 बजकर 7 मिनट से शुरू हो रही है, जो अगले दिन 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगी। उदयातिथि के अनुसार, 13 जून 2026 (शनिवार) को मासिक शिवरात्रि की पूजा करना सबसे अच्छा और शुभ रहेगा।
Advertisement
Adhik Maas Shivratri Shubh Muhurat: पूजन के लिए शुभ मुहूर्त

- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:07 से सुबह 04:49 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 से दोपहर 03:28 तक
- गोधूलि मुहूर्त (शाम का समय): शाम 07:03 से शाम 07:24 तक
- निशिता मुहूर्त (रात की मुख्य पूजा): रात 11:56 से रात 11:38 तक
Masik Shivratri Puja Vidhi: मासिक शिवरात्रि पूजा विधि

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और मन में व्रत रखने का संकल्प लें।
- मासिक शिवरात्रि की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए शाम या रात को पूजा के समय सबसे शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद चढ़ाएं।
- अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं, कलावा बांधें और बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं।
- पूजा करते समय 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती के सामने धूप और दीपक जलाएं।
- मासिक शिवरात्रि की व्रत कहानी पढ़ें या सुनें और आखिर में कपूर जलाकर शिव जी की आरती करें।
- शिवरात्रि की रात को सोए बिना भगवान के भजन-कीर्तन और भक्ति करने का बहुत बड़ा महत्व होता है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Join Channel