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Aja Ekadashi Vrat Katha: राजा हरिश्चन्द्र की इस कथा के बिना अधूरा है अजा एकादशी का व्रत! जानिए भगवान विष्णु की पूजा की सही विधि

अजा एकादशी, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने का विशेष महत्व है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। कथा के अनुसार, अयोध्या के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपनी प्रतिज्ञा निभाने के लिए अपना सारा राज्य ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया और दक्षिणा चुकाने के लिए अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को बेच दिया।
10:54 AM Sep 07, 2026 IST | Khushi Srivastava
अजा एकादशी, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने का विशेष महत्व है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। कथा के अनुसार, अयोध्या के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपनी प्रतिज्ञा निभाने के लिए अपना सारा राज्य ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया और दक्षिणा चुकाने के लिए अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को बेच दिया।
aja ekadashi vrat katha  राजा हरिश्चन्द्र की इस कथा के बिना अधूरा है अजा एकादशी का व्रत  जानिए भगवान विष्णु की पूजा की सही विधि
Aja Ekadashi Vrat Katha(AI Generated)
Aja Ekadashi Vrat Katha: आज 7 सितंबर, सोमवार को अजा एकादशी का व्रत है। हिंदू धर्म में भादों महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अजा एकादशी बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। माना जाता है कि सही नियम से अजा एकादशी का व्रत करने से पुण्य मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। एकादशी की पूजा में व्रत कथा पढ़ना या सुनना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती। इसलिए आज पूजा के बाद अजा एकादशी की कथा का पाठ जरूर करें।

अजा एकादशी व्रत कथा

Aja Ekadashi Vrat Katha
Aja Ekadashi Vrat Katha (AI Generated)

पुरानी कहानियों के अनुसार, अयोध्या में हरिश्चन्द्र नाम के एक राजा थे जो अपनी सच्चाई और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। एक बार देवताओं ने उनकी परीक्षा लेने का मन बनाया। राजा ने सपने में देखा कि उन्होंने अपना सारा राज्य ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया है। अगली सुबह विश्वामित्र सच में आ गए और राज्य मांगने लगे। राजा ने अपने धर्म का पालन करते हुए उन्हें अपना पूरा राज्य दे दिया। इसके बाद दान की दक्षिणा चुकाने के लिए राजा को अपनी पत्नी, बेटे और खुद को बेचना पड़ा। राजा को श्मशान में काम कराने वाले एक व्यक्ति ने खरीद लिया।

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राजा श्मशान घाट पर कफन इकट्ठा करने का काम करने लगे, लेकिन इस बुरे समय में भी उन्होंने सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ा। कई साल बीत जाने पर राजा को इस काम से बहुत दुख हुआ और वे इससे छुटकारा पाने का रास्ता खोजने लगे। तभी गौतम ऋषि वहां आए और राजा ने उन्हें अपना सारा दुख बताया। गौतम ऋषि ने उन्हें भादों महीने की अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इससे उनके सारे पाप खत्म हो जाएंगे।

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राजा हरिश्चन्द्र ने ऋषि की बात मानकर पूरी विधि-विधान से व्रत रखा और रात भर जागकर भगवान की भक्ति की। इस व्रत के असर से उनके सारे पाप मिट गए, उन्हें उनका खोया हुआ राज्य वापस मिल गया और उनका जीवन खुशियों से भर गया। अंत में वे परिवार के साथ स्वर्ग गए। माना जाता है कि जो भी यह व्रत सही तरीके से करता है, उसके पाप खत्म हो जाते हैं, उसे स्वर्ग मिलता है और इस कथा को केवल सुनने से ही अश्वमेध यज्ञ जितना पुण्य मिलता है।

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अजा एकादशी के नियम (Aja Ekadashi Fasting Rules)

  • तामसिक भोजन न करें: इस दिन सिर्फ सादा और शुद्ध (सात्विक) खाना ही खाना चाहिए। मांस, शराब, लहसुन और प्याज जैसी चीज़ों से पूरी तरह दूर रहें। व्रत के दौरान फलाहार में भी सात्विक चीजें ही खाएं।
  • चावल न खाएं: एकादशी के दिन चावल खाना मना होता है। इसलिए इस दिन व्रत रखने वालों को चावल से दूर रहना चाहिए। कई घरों में तो इस दिन पूरे परिवार के लिए भी चावल नहीं बनाए जाते हैं।
  • तुलसी के पत्ते न तोड़ें: तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्यारी हैं, लेकिन एकादशी के दिन उन्हें तोड़ना मना होता है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें और इस दिन तुलसी के पौधे को बेवजह न छुएं।
  • गुस्सा और लड़ाई-झगड़ा न करें: एकादशी का मतलब सिर्फ खाने पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि मन को शांत रखना भी है। इस दिन किसी से बहस न करें, कड़वे शब्द न बोलें और गुस्सा न करें। गलत विचारों से दूर रहकर भगवान के नाम का ध्यान करें।
  • दिन में न सोएं: इस दिन दोपहर में सोने के बजाय भगवान के भजन, मंत्र जाप और पूजा-पाठ में समय बिताना अच्छा माना जाता है। हालांकि, अगर तबीयत खराब हो तो आराम किया जा सकता है।

अजा एकादशी पर ऐसे करें विष्णु पूजन (Aja Ekadashi Puja Vidhi)

Aja Ekadashi Puja Vidhi
Aja Ekadashi Puja Vidhi (AI Generated)
  • सुबह सूरज उगने से पहले उठकर स्नान करें और पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। साफ या पीले कपड़े पहनें। हाथ में
  • जल, तिल और फूल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा के स्थान को साफ करके लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
  • भगवान विष्णु को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पीले कपड़े, पीला चंदन, रोली, चावल और पीले फूल चढ़ाएं।
  • भगवान को तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए इन्हें
  • एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
  • देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। भगवान को पीले फल, मिठाई, पंजीरी, केसर की खीर या पंचामृत का भोग लगाएं। भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें।
  • अजा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और आखिर में आरती करें।
  • इस व्रत में अनाज और चावल खाना मना होता है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से फल, दूध या मखाने का सेवन कर सकते हैं।
  • अगले दिन किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद ही व्रत खोलें।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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