Gauri Vrat 2026: कब से शुरू हो रहा है 5 दिनों का गौरी व्रत? मनचाहे जीवनसाथी के लिए नोट कर लें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Gauri Vrat 2026: हिंदू धर्म में माता गौरी और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए कई व्रत रखे जाते हैं, जिनमें गौरी व्रत बहुत खास माना जाता है। यह व्रत 5 दिनों तक चलता है, जिसमें भक्त माता गौरी, शिव जी और गणेश जी की पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन और नियम से यह व्रत करने पर हर इच्छा पूरी होती है। इस व्रत को 'मोरकट व्रत' भी कहते हैं। इसकी शुरुआत आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है, जिस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। व्रत का आखिरी दिन आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा को होता है। आइए, जानें कि इस साल यह व्रत कब शुरू होगा, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि क्या है।
गौरी व्रत कब से शुरू होगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 9:12 बजे शुरू होगी और 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे खत्म होगी। उदय तिथि के अनुसार, गौरी व्रत की शुरुआत 25 जुलाई 2026, शनिवार से होगी।
गौरी व्रत का समापन कब होगा? (Gauri Vrat Parana Time 2026)
पांच दिनों की पूजा के बाद आषाढ़ महीने की गुरु पूर्णिमा के दिन इस व्रत को खोला जाता है। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6:18 बजे से शुरू होकर 29 जुलाई की रात 8:05 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार, इस साल व्रत का समापन 29 जुलाई 2026, बुधवार को होगा।
पांच दिनों तक कैसे की जाती है पूजा? (Gauri Vrat Puja Vidhi)

- इस व्रत में रोज़ सुबह और शाम माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा की जाती है।
- कई जगहों मिट्टी से बनी शिव-पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां बनाकर स्थापित की जाती हैं।
- इसके बाद दीपक जलाकर उन्हें फूल, चावल, रोली, चंदन, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है।
- पूजा करते समय शिव-पार्वती के मंत्र पढ़े जाते हैं।
- घरों में रोज शाम को आरती के बाद भजन-कीर्तन और रात को जागरण की परंपरा भी है।
- इन पांच दिनों में पूरी तरह शाकाहारी और सादा भोजन किया जाता है।
गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
माना जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या और व्रत किया था। इसी भावना के साथ आज भी लोग यह व्रत करते हैं। मान्यता है कि जो कुंवारी लड़कियां इस व्रत को सच्चे मन से रखती हैं, उन्हें मनचाहा पति मिलता है। वहीं, शादीशुदा महिलाओं के जीवन में आपसी प्यार, भरोसा और सौभाग्य बढ़ता है, साथ ही परिवार में सुख-शांति और खुशहाली आती है।

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