W3Schools
Advertisement

Har Chhath Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए आज रखा जा रहा है हर छठ व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और कथा

हर छठ व्रत, जिसे हल षष्ठी, ललही छठ, चंदन छठ या कमर छठ भी कहा जाता है, हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, खुशहाली और परिवार की भलाई के लिए व्रत रखती हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है।
11:58 AM Sep 02, 2026 IST | Khushi Srivastava
हर छठ व्रत, जिसे हल षष्ठी, ललही छठ, चंदन छठ या कमर छठ भी कहा जाता है, हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, खुशहाली और परिवार की भलाई के लिए व्रत रखती हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है।
har chhath vrat 2026  संतान की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए आज रखा जा रहा है हर छठ व्रत  जानें पूजा का शुभ मुहूर्त  विधि और कथा
Har Chhath Vrat 2026 (AI Generated)
Har Chhath Vrat 2026: आज हर छठ का पावन पर्व है। हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को हल षष्ठी का व्रत रखा जाता है। इसे हर छठ, हल छठ, ललही छठ, चंदन छठ या कमर छठ भी कहते हैं। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, खुशहाली और परिवार की भलाई के लिए उपवास रखती हैं। आइए, जानें हल छठ पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त, विधि और कथा के बारे में।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Hal Chhath 2026)

  • छठी तिथि शुरू: 2 सितंबर 2026, सुबह 06:12 बजे
  • छठी तिथि खत्म: 3 सितंबर 2026, सुबह 04:25 बजे
  • सुबह की पूजा का समय: सुबह 06:12 से 08:10 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:05 बजे तक

इस विधि से करें पूजा (Hal Chhath Puja Vidhi)

Har Chhath Vrat 2026
Har Chhath Vrat 2026 (AI Generated)
  1. हरछठ के दिन महिलाएं सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  2. घर के बाहर या आंगन में चौक बनाएं और उस पर हल तथा बलराम जी का प्रतीक बनाकर पूजा करें।
  3. घर की दीवार पर गेरू, मिट्टी या भैंस के गोबर से छठ माता की तस्वीर बनाएं।
  4. इसके बाद सबसे पहले गणेश जी और माता गौरा की पूजा करें।
  5. चावल के घोल (ऐपन) से उनका श्रृंगार करें।
  6. जमीन को लीपकर घर में ही एक छोटा सा गड्ढा बनाएं। उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पौधे लगाएं और वहां बैठकर पूजा-पाठ करें।
  7. हल षष्ठी की कथा सुनें।
  8. अंत में आरती करें और भगवान को भोग लगाएं।

खान-पान के नियम

इस व्रत में हल से जुते हुए खेत का अनाज या फल खाना मना होता है। इसलिए महिलाएं बिना हल के उगे हुए अनाज और फल खाती हैं, जैसे- तिन्नी/फसई का चावल और महुआ का फल।

Advertisement

हरछठ की कहानियां (Har Chhath Vrat Katha Hindi)

Har Chhath Vrat 2026
Har Chhath Vrat 2026 (AI Generated)
हलछठ से जुड़ी एक पुरानी कहानी के अनुसार, भगवान कृष्ण के भाई बलराम जी के जन्म से पहले माता रोहिणी ने यह व्रत रखा था। इसी व्रत के असर से बलराम जी को बहुत ताकत और लंबी उम्र का वरदान मिला था।
Advertisement

एक अन्य कहानी के अनुसार, एक गर्भवती ग्वालिन दूध-दही बेचने जा रही थी। रास्ते में उसे दर्द हुआ और उसने एक झरबेरी के पेड़ के नीचे बच्चे को जन्म दिया। वह बच्चे को वहीं सुलाकर दूध बेचने चली गई। उस दिन हरछठ का व्रत था और सबको सिर्फ भैंस का दूध चाहिए था, लेकिन ग्वालिन ने लालच में आकर गाय के दूध को भैंस का बताकर बेच दिया। इससे छठ माता गुस्सा हो गईं और उन्होंने उसके बच्चे की जान ले ली। जब ग्वालिन वापस आई और अपने बच्चे को देखा, तो रोने लगी और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसके सच्चे पछतावे को देखकर छठ माता खुश हो गईं और बच्चे को फिर से जिंदा कर दिया। तभी से मां अपने बेटे की लंबी उम्र के लिए यह व्रत और पूजा करती हैं।

Advertisement

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
Also Read: Krishna Janmashtami ki Katha: देवकी की आठवीं संतान के रूप में क्यों जन्मे भगवान कृष्ण? जन्माष्टमी पर जरूर करें इस पौराणिक कथा का पाठ
Advertisement
Author Image

Khushi Srivastava

View all posts

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

Advertisement
Advertisement
×