Har Chhath Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए आज रखा जा रहा है हर छठ व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और कथा
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Hal Chhath 2026)
- छठी तिथि शुरू: 2 सितंबर 2026, सुबह 06:12 बजे
- छठी तिथि खत्म: 3 सितंबर 2026, सुबह 04:25 बजे
- सुबह की पूजा का समय: सुबह 06:12 से 08:10 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:05 बजे तक
इस विधि से करें पूजा (Hal Chhath Puja Vidhi)

- हरछठ के दिन महिलाएं सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- घर के बाहर या आंगन में चौक बनाएं और उस पर हल तथा बलराम जी का प्रतीक बनाकर पूजा करें।
- घर की दीवार पर गेरू, मिट्टी या भैंस के गोबर से छठ माता की तस्वीर बनाएं।
- इसके बाद सबसे पहले गणेश जी और माता गौरा की पूजा करें।
- चावल के घोल (ऐपन) से उनका श्रृंगार करें।
- जमीन को लीपकर घर में ही एक छोटा सा गड्ढा बनाएं। उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पौधे लगाएं और वहां बैठकर पूजा-पाठ करें।
- हल षष्ठी की कथा सुनें।
- अंत में आरती करें और भगवान को भोग लगाएं।
खान-पान के नियम
इस व्रत में हल से जुते हुए खेत का अनाज या फल खाना मना होता है। इसलिए महिलाएं बिना हल के उगे हुए अनाज और फल खाती हैं, जैसे- तिन्नी/फसई का चावल और महुआ का फल।
हरछठ की कहानियां (Har Chhath Vrat Katha Hindi)

एक अन्य कहानी के अनुसार, एक गर्भवती ग्वालिन दूध-दही बेचने जा रही थी। रास्ते में उसे दर्द हुआ और उसने एक झरबेरी के पेड़ के नीचे बच्चे को जन्म दिया। वह बच्चे को वहीं सुलाकर दूध बेचने चली गई। उस दिन हरछठ का व्रत था और सबको सिर्फ भैंस का दूध चाहिए था, लेकिन ग्वालिन ने लालच में आकर गाय के दूध को भैंस का बताकर बेच दिया। इससे छठ माता गुस्सा हो गईं और उन्होंने उसके बच्चे की जान ले ली। जब ग्वालिन वापस आई और अपने बच्चे को देखा, तो रोने लगी और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसके सच्चे पछतावे को देखकर छठ माता खुश हो गईं और बच्चे को फिर से जिंदा कर दिया। तभी से मां अपने बेटे की लंबी उम्र के लिए यह व्रत और पूजा करती हैं।

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