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Hartalika Teej Shubh Muhurat: 13 या 14 सितंबर, कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत? पति की लंबी उम्र के लिए ऐसे करें शिव-गौरी की पूजा

हरतालिका तीज हर साल भादो महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद जीवन के लिए रखती हैं, जबकि कुंवारी लड़कियां मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
01:11 PM Sep 07, 2026 IST | Khushi Srivastava
हरतालिका तीज हर साल भादो महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद जीवन के लिए रखती हैं, जबकि कुंवारी लड़कियां मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
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Hartalika Teej Shubh Muhurat (AI Generated)
Hartalika Teej Shubh Muhurat: हर साल भादो महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। शादीशुदा औरतें अपने पति की लंबी उम्र, खुशहाल जीवन और सुहाग के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी लड़कियां मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत करती हैं। आइए, जानें इस साल हरतालिका तीज कब है, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और विधि क्या है?

कब है हरतालिका तीज?

Hartalika Teej 2026
Hartalika Teej 2026 (AI Generated)
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, भादो महीने के शुक्ल पक्ष की तीज तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:09 बजे शुरू होगी। यह तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:07 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर  को रखा जाएगा।

हरतालिका तीज पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Hartalika Teej Shubh Muhurat)

  • सुबह की पूजा का समय: सुबह 06:05 बजे से 07:06 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से 05:19 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:52 बजे से 12:41 बजे तक

शिव-गौरी की पूजा कैसे करें (Hartalika Teej 2026 Puja Vidhi)

Hartalika Teej 2026 Puja Vidhi
Hartalika Teej 2026 Puja Vidhi (AI Generated)
  • व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • अगर आप पहली बार व्रत रख रही हैं, तो निर्जला व्रत रखने का संकल्प लें।
  • पूजा की थाली में बेलपत्र, फूल, अगरबत्ती, दीपक, फल, पानी, पंचामृत और सुहाग की चीजें रख लें।
  • शाम को दोबारा नहाकर 16 श्रृंगार करें। पूजा की जगह को साफ करके फूलों से सजाएं और एक छोटा मंडप बनाएं।
  • इसके बाद मिट्टी या बालू (रेत) से शिव जी, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां बनाकर स्थापित करें।
  • सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। फिर शिव जी और पार्वती जी की नियम से पूजा करें।
  • शिव जी को जल, पंचामृत, बेलपत्र, फूल और 16 तरह के पत्ते चढ़ाएं। माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ियां, चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं।
  • इसके बाद मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के बाद शिव-पार्वती की परिक्रमा करें, व्रत कथा सुनें और पूरी रात भजन-कीर्तन करें।
  • पूजा के बाद भगवान को खीरे और हलवे का भोग लगाएं।
  • परंपरा के अनुसार, खीरे का प्रसाद खाकर ही व्रत खोला जाता है।
  • अगली सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनें। माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं और वही सिंदूर अपनी मांग में लगाएं।
  • माना जाता है कि इससे शादीशुदा जिंदगी खुशहाल रहती है और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है।
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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