Kajari Teej 2026: कजरी तीज पर ये 8 गलतियां भूलकर भी न करें, वरना अधूरा रह जाएगा पूजा और व्रत का फल
आज, 31 अगस्त (रविवार) कजरी तीज मनाई जा रही है। हिन्दू धर्म में कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत करती हैं। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है, जिससे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छा जीवनसाथी पाने के लिए ये व्रत कर सकती हैं। इस व्रत को लेकर कुछ कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन न करने पर व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है। आइए जानतें हैं, कौन-सी हैं वो गलतियां, जिसे करने से व्रत का फल नहीं मिलता है।
कजरी तीज पर भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां
1. काले और सफेद कपड़े न पहनें
तीज के त्योहार मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए होता है। इस दिन सुहागिन महिलाओं को काले, नीले, सफेद या भूरे रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसके बजाय लाल, हरे या पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है।
2. दिन में न सोएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज के व्रत के दौरान महिलाओं को दिन में नहीं सोना चाहिए। कहा जाता है कि अगर इस व्रत में दिन में कोई सोता है, तो उसका व्रत पूरा नहीं माना जाता। इसके बजाय पूरा दिन भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन में बिताना चाहिए।
3. नमक का सेवन न करें
इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखा जाता है। अगर आप फलाहार व्रत रख रही हैं, तो भोजन में साधारण या सेंधा नमक का प्रयोग न करें, क्योंकि कई परंपराओं में तीज के व्रत में नमक खाना वर्जित माना गया है।
4. गुस्से और अपशब्द से बचें
व्रत के दिन किसी पर गुस्सा न करें, घर के बड़ों का अपमान न करें और अपने मुंह से किसी को भी अपशब्द न बोले।
5. बाल और नाखून न काटें

कजरी तीज के पावन दिन बाल या नाखून काटने, बाल कटवाने या झाड़ू लगाने जैसे कामों से बचना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।
6. सोलह श्रृंगार न छोड़ें
यह पर्व सुहाग से जुड़ा है, इसलिए पूजा के दौरान सुहाग की सामग्री- सिंदूर, चूड़ियां, महावर आदि अर्पित करना न भूलें। साथ ही इस दिन खुद भी सोलह श्रृंगार जरूर करें। अधूरा श्रृंगार अशुभ माना जाता है।
7. पति से लड़ाई न करें
कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने लंबी आयु के लिए रखती हैं। तो इस दिन पति से लड़ाई-झगड़ा न करें, वरना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
8. कथा और पूजा अधूरी न छोड़े

कजरी तीज की कथा सुने बिना और चंद्रमा की पूजा किए बिना व्रत अधूरा माना जाता है। इसलिए पूजा को बीच में अधूरा न छोड़ें और पूरी श्रद्धा के साथ आरती संपन्न करें। वरना व्रत और पूजा का फल अधूरा रह सकता है।

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