Kajri Teej 2026 Puja Vidhi: कजरी तीज पर पति की लंबी आयु के लिए ऐसे करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और सामग्री की लिस्ट
कजरी तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। कुंवारी लड़कियां भी उत्तम जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत कर सकती हैं। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। लेख में कजरी तीज 2026 के लिए पूजा के शुभ मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, संध्या काल, अमृत समय, शुभ समय और लाभ समय) विस्तार से बताए गए हैं।
01:03 PM Aug 31, 2026 IST | Khushi Srivastava
Kajri Teej 2026 Puja Vidhi: आज सोमवार यानी 31 अगस्त को कजरी तीज मनाई जा रही है। ये त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करती हैं। वहीं, कुंवारी लड़कियां भी अच्छा जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत कर सकती हैं। आइए, आज पूजा के शुभ समय क्या है, पूजा सामग्री और विधि क्या है।
पूजा के लिए शुभ समय (Kajri Teej 2026 Shubh Muhurat)

- सुबह जल्दी पूजा (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 04:29 से 05:14 तक
- दोपहर की पूजा (अभिजीत मुहूर्त): सुबह 11:56 से दोपहर 12:47 तक
- शाम की पूजा (संध्या काल): शाम 06:44 से 07:51 तक
- सुबह का अमृत समय: सुबह 5:58 से 7:34 तक
- सुबह का शुभ समय: सुबह 9:10 से 10:45 तक
- दोपहर का लाभ समय: दोपहर 3:33 से शाम 5:08 तक
पूजा के लिए जरूरी सामान (Kajri Teej Puja Samagri)
- शिव जी, माता पार्वती, और तीज माता (नीमड़ी माता) की तस्वीर या मूर्ति
- एक छोटी चौकी
- लाल या पीला साफ कपड़ा
- साफ मिट्टी
- सिंदूर
- बिंदी
- चूड़ियां
- मेहंदी
- काजल
- आलता
- कलश
- नारियल
- लाल धागा (कलावा)
- गंगाजल
- गाय का कच्चा दूध
- दही
- शहद
- घी
- चीनी
- पंचामृत
- रोली
- कुमकुम
- हल्दी
- साबुत चावल
- धूप
- दीया
- कपूर
- फूल
- नीम की डाली
- केले के पत्ते
- बेलपत्र
- दूब घास
- जनेऊ
- सुपारी
- दक्षिणा
- सत्तू
- खीरा
- ककड़ी
- नींबू
- मौसम वाले फल
- मिठाई
- व्रत कथा की किताब
व्रत और पूजा कैसे करें

- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें, साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा घर को साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर शिव जी और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- एक मिट्टी के बर्तन में या सीधे मिट्टी में नीम की टहनी लगाएं।
- शाम के समय 16 श्रृंगार करके अच्छी तरह तैयार हों।
- शाम को दीवार या थाली पर गोबर से एक छोटे तालाब जैसी आकृति बनाएं।
- उसमें नीम की टहनी लगाकर 'नीमड़ी माता' (शिव-पार्वती का रूप) को स्थापित करें।
- नीमड़ी माता के पास भगवान शिव और पार्वती जी की अच्छे से पूजा करें।
- माता पार्वती को सुहाग का सारा सामान चढ़ाएं।
- माता को लाल फूल और शिव जी को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं।
- पार्वती जी को सत्तू के लड्डू, हलवा और पंचामृत का भोग लगाएं।
- नीमड़ी माता को रोली, अक्षत, ककड़ी, सत्तू और फल चढ़ाएं।
- इसके बाद व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
- रात में चांद निकलने पर उसे अर्घ्य दें।
- चांद को कच्चे दूध, जल, ककड़ी और अक्षत से अर्घ्य देकर उनकी पूजा करें।
- इसके बाद सत्तू या सादा खाना खाकर अपना व्रत खोलें।
- व्रत खोलने से पहले अपने पति और घर के बड़े लोगों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर लें।
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