Krishna Janmashtami ki Katha: देवकी की आठवीं संतान के रूप में क्यों जन्मे भगवान कृष्ण? जन्माष्टमी पर जरूर करें इस पौराणिक कथा का पाठ
कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन मथुरा में माता देवकी के आठवें पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में अत्याचारी राजा कंस ने अपने पिता उग्रसेन को कैद कर मथुरा पर राज किया। उसकी बहन देवकी के विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगा।
कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन मथुरा में माता देवकी के आठवें पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में अत्याचारी राजा कंस ने अपने पिता उग्रसेन को कैद कर मथुरा पर राज किया। उसकी बहन देवकी के विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगा।
Krishna Janmashtami ki Katha (AI Generated)
Krishna Janmashtami ki Katha: हिंदू धर्म में भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को बहुत पवित्र माना जाता है। इस दिन देश और विदेश में कृष्ण जन्माष्टमी, बहुत ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी का त्योहार 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन मथुरा में माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था। लेकिन, भगवान ने माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में ही जन्म क्यों लिया। इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा
Krishna Janmashtami ki Katha (AI Generated)
द्वापर युग में कंस नाम का एक बहुत ही निर्दयी राजा था। उसके पिता उग्रसेन उसके बुरे कामों से बहुत परेशान थे। जब उन्होंने कंस को रोकने की कोशिश की, तो कंस ने अपने पिता को ही गद्दी से हटाकर खुद राजा बन गया और मथुरा की जनता पर अत्याचार करने लगा।
कंस भले ही कितना भी बुरा था, लेकिन वह अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था। उसने खुद वासुदेव जी से अपनी बहन की शादी कराई। शादी के बाद जब वह अपनी बहन को विदा करके रथ से ले जा रहा था, तब एक ऐसी घटना घटी जिसने सबकी जिंदगी बदल दी।
Advertisement
रास्ते में अचानक आसमान से आकाशवाणी गूंजी कि जिस बहन को तू इतने प्यार से विदा कर रहा है, उसी का आठवां बच्चा तेरी मौत की वजह बनेगा। यह सुनते ही कंस गुस्से से भर गया और वासुदेव जी को मारने के लिए दौड़ा। तब देवकी ने कंस को वचन दिया कि वे अपने हर बच्चे को पैदा होते ही उसे सौंप देंगी। इसके बाद कंस ने दोनों को जेल में बंद कर दिया और एक-एक करके देवकी के 7 बच्चों को बेरहमी से मार डाला।
Advertisement
Krishna Janmashtami ki Katha (AI Generated)
जब आठवें बच्चे के जन्म का समय पास आया, तो कंस ने जेल पर बहुत कड़ा पहरा लगा दिया। जन्म से पहले भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव जी को सपने में दर्शन दिए और कहा कि वे खुद उनके घर इंसान के रूप में जन्म लेंगे। उन्होंने वासुदेव जी से कहा कि जन्म के तुरंत बाद वे बच्चे को गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर छोड़ आएं।
Advertisement
भाद्रपद महीने के काले पक्ष की रात को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। भगवान की कृपा से जेल के सारे पहरेदार बेहोश हो गए और दरवाजे अपने आप खुल गए। वासुदेव जी बाल कृष्ण को एक टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करके गोकुल ले गए। रास्ते में शेषनाग ने बारिश से उनकी रक्षा की। गोकुल पहुंचकर उन्होंने कृष्ण को यशोदा जी के पास सुला दिया और यशोदा जी की नवजात बेटी को अपने साथ ले आए। कंस ने उस बच्ची को देवकी का आठवां बच्चा समझकर मारना चाहा, लेकिन वह बच्ची उसके हाथ से छूटकर आसमान में चली गई और बिजली बन गई। आसमान से आवाज आई कि तुझे मारने वाला सुरक्षित गोकुल पहुंच चुका है।
आगे चलकर भगवान कृष्ण ने बड़े होकर अत्याचारी कंस का वध किया और मथुरा के लोगों को उसके दुखों से आजादी दिलाई। अपने जीवन में उन्होंने कई चमत्कार किए और गीता का ज्ञान देकर दुनिया को सही रास्ता दिखाया।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।