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Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: आषाढ़ मास की संकष्टी चतुर्थी कब? सुख-समृद्धि के लिए ऐसे करें बप्पा की पूजा, नोट कर लें सही तिथि

02:54 PM Jun 30, 2026 IST | Khushi Srivastava
krishnapingala sankashti chaturthi 2026  आषाढ़ मास की संकष्टी चतुर्थी कब  सुख समृद्धि के लिए ऐसे करें बप्पा की पूजा  नोट कर लें सही तिथि
Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026 (AI generated)
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत बहुत खास होता है। यह व्रत भगवान गणेश को खुश करने के लिए रखा जाता है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत आता है। इस दिन लोग पूरे नियम के साथ गणेश जी की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से बप्पा खुश होते हैं, घर में सुख-शांति लाते हैं और जीवन की सारी परेशानियां दूर कर देते हैं। आषाढ़ के महीने में आने वाली इस चतुर्थी को 'कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी' कहते हैं। आइए, जानें इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी (Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026) कब है, साथ में जानें इस दिन की आसान पूजा विधि के बारे में।

Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026 में कब है?

Sankashti Chaturthi Puja
Sankashti Chaturthi Puja (AI Generated)
चतुर्थी तिथि की शुरुआत 3 जुलाई 2026 को सुबह 11:21 बजे होगी और इसका समापन अगले दिन 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 बजे होगा। व्रत के दिन चंद्रोदय का समय रात 09:51 बजे है, जिसमें स्थानीय शहरों के अनुसार थोड़ा बदलाव हो सकता है। साल 2026 में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जुलाई को रखा जाएगा। इस व्रत में रात को चंद्रमा दर्शन और अर्घ्य का विशेष महत्व है, और 3 जुलाई की रात को ही चतुर्थी तिथि रहेगी।
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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें Ganesh Ji Ki Puja

Ganesh Ji Ki Puja
Ganesh Ji Ki Puja (AI Generated)
  • सुबह जल्दी उठकर नहाएं और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत और गणेश जी की पूजा का मन में संकल्प लें।
  • शुभ मुहूर्त में एक छोटी चौकी पर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • बप्पा को जल चढ़ाएं और उन्हें सुंदर कपड़े, फूल, माला और चंदन लगाएं।
  • इसके बाद अक्षत, हल्दी, धूप-दीप, पान, सुपारी और फल चढ़ाकर भगवान की पूजा करें।
  • गणपति बप्पा को सिंदूर लगाएं और दूर्वा की 21 गांठें चढ़ाएं।
  • गणेश जी को उनके पसंदीदा मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और दीपक जलाएं।
  • पूजा करते समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  • कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत की कहानी पढ़ें या सुनें, फिर गणेश जी की आरती करें।
  • आखिरी में हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए भगवान से माफी मांगें।

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

इस खास दिन भगवान गणेश के 'कृष्णपिंगल' रूप की पूजा की जाती है, जिनका रंग भूरा और काला माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश खुद अपने भक्तों के सारे दुख और मुश्किलें दूर करने के लिए धरती पर आते हैं। जो कोई भी इस दिन पूरी श्रद्धा और सही तरीके से व्रत रखता है, उसके मन का डर, उलझन और तनाव दूर हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली आती है।

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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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