Vat Purnima Vrat 2026 Date: सुहागिनें इस दिन रखेंगी वट पूर्णिमा व्रत; नोट कर लें अमृत मुहूर्त और बरगद की पूजा की संपूर्ण विधि
04:35 PM Jun 02, 2026 IST | Khushi Srivastava
Vat Purnima Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में वट पूर्णिमा व्रत को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। शादीशुदा महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी उम्र, घर की सुख-शांति और खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के लिए रखती हैं। यह त्योहार ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। अगर आप भी इस साल यह व्रत रख रही हैं, तो यहां जानें Vat Purnima Vrat Kab Hai, शुभ समय और पूजा विधि क्या है।
Vat Purnima Vrat 2026 Date: वट पूर्णिमा व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 को सुबह 03:07 बजे शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 30 जून को सुबह 05:27 बजे खत्म होगी। उदयातिथि के अनुसार, इस साल वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून, सोमवार को रखा जाएगा।
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Vat Purnima Shubh Muhurat: पूजा के लिए शुभ समय
29 जून 2026 को पूजा करने के अच्छे समय इस प्रकार हैं-
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- अमृत मुहूर्त (सुबह): सुबह 05:26 बजे से 07:11 बजे तक
- शुभ मुहूर्त: सुबह 08:55 बजे से 10:40 बजे तक
- चर मुहूर्त: दोपहर 02:09 बजे से 03:54 बजे तक
- लाभ मुहूर्त: दोपहर 03:54 बजे से शाम 05:38 बजे तक
- अमृत मुहूर्त (शाम): शाम 05:38 बजे से रात 07:23 बजे तक
Vat Purnima Vrat Puja Vidhi: वट पूर्णिमा व्रत पूजा नियम

- सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करें।
- फल, फूल, रोली, कुमकुम, दीपक, कच्चा सूत, भीगा चना और गुड़ सजाएं।
- बरगद के पेड़ के पास दीपक जलाएं, हल्दी-कुमकुम लगाएं और चना-गुड़ अर्पित करें।
- हाथ में कच्चा सूत लेकर वृक्ष की 7, 11 या 21 बार परिक्रमा करते हुए धागा लपेटें।
- सावित्री-सत्यवान की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- अंत में आरती कर पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना करें।
Vat Purnima Vrat ka Mahatva: वट पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को बहुत पवित्र माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी का वास होता है। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करके हमेशा सुहागन रहने का आशीर्वाद मांगती हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बहुत ज्यादा मनाया जाता है।
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वट सावित्री और वट पूर्णिमा में क्या अंतर है?

वट सावित्री और वट पूर्णिमा, दोनों व्रतों का उद्देश्य और महत्व बिल्कुल एक जैसा ही है। इनमें सिर्फ तारीख का अंतर होता है। वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को रखा जाता है, जबकि वट पूर्णिमा का व्रत ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को रखा जाता है। दोनों ही व्रतों में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी परिवार की कामना करती हैं।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
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