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Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat Katha: अधिक मास की संकष्टी आज, व्रत के साथ जरूर करें इस पौराणिक कथा का पाठ; दूर होंगे सारे संकट

11:33 AM Jun 03, 2026 IST | Khushi Srivastava
vibhuvan sankashti chaturthi vrat katha  अधिक मास की संकष्टी आज  व्रत के साथ जरूर करें इस पौराणिक कथा का पाठ  दूर होंगे सारे संकट
Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat Katha (AI Generated)
Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat Katha: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विभुवन संकष्टी कहते हैं। इस साल यह संकष्टी आज यानी 3 जून 2026 को मनाई जा रही है। इस खास दिन भगवान गणेश के 'विभुवन' रूप की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो भी भक्त इस दिन व्रत रखता है, पूरे नियम-कानून से बप्पा की पूजा करता है और उन्हें नारियल के लड्डू का भोग लगाता है, उसके जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। इस व्रत का पुण्य आम दिनों के संकष्टी व्रत से बहुत ज्यादा मिलता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को विभुवन संकष्टी चतुर्थी की कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। आइए, Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026 की व्रत कथा के बारे में।

Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat Katha: विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पौराणिक कथा

Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat Katha
Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat Katha (AI Generated)

शास्त्रों में बताई गई कहानी के अनुसार, एक शहर में एक बुढ़िया माई रहती थीं। वह रोज मिट्टी के गणेश जी बनाकर उनकी पूजा करती थीं। लेकिन उनकी मुश्किल यह थी कि मिट्टी की होने की वजह से मूर्ति रोज गल जाती थी और उन्हें हर दिन नई मूर्ति बनानी पड़ती थी।

एक दिन उनके शहर में एक सेठ का मकान बन रहा था। बुढ़िया माई ने सोचा कि क्यों न मकान बनाने वाले मिस्त्री से पत्थर के गणेश जी बनवा लूं। उन्होंने मिस्त्री से जाकर कहा, "भाई, मेरे लिए पत्थर के एक गणेश जी बना दो।" इस पर मिस्त्री ने ताना मारते हुए कहा, "अरे बुढ़िया माई! जितने समय में हम तुम्हारे पत्थर के गणेश जी बनाएंगे, उतने में तो हम अपनी दीवार खड़ी कर लेंगे।"

मिस्त्री की बात सुनकर बुढ़िया माई को गुस्सा आ गया। उन्होंने कहा, "राम करे तुम्हारी दीवार हमेशा टेढ़ी ही बने।" इसके बाद मिस्त्री जब भी दीवार बनाते, वह टेढ़ी हो जाती और गिर जाती। वे बार-बार दीवार बनाते और वह बार-बार गिर जाती। ऐसा करते-करते शाम हो गई।

शाम को जब सेठ काम देखने आए, तो उन्होंने देखा कि आज तो कुछ भी काम नहीं हुआ। जब सेठ ने इसका कारण पूछा, तो मिस्त्री बोले, "यहां एक बुढ़िया माई आई थीं। वह पत्थर के गणेश जी बनाने को कह रही थीं, पर हमने मना कर दिया। तब उन्होंने कहा कि तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। बस, तभी से यह दीवार सीधी बन ही नहीं रही है।"

यह सुनकर सेठ ने बुढ़िया माई को बुलवाया और कहा, "माई, हम तुम्हें सोने के गणेश जी बनवा कर देंगे, तुम बस हमारी यह दीवार सीधी करवा दो।"जैसे ही सेठ ने बुढ़िया माई को सोने की गणेश मूर्ति दी, वैसे ही सेठ की दीवार बिल्कुल सीधी और मजबूत हो गई।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।