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वित्त मंत्री सीतारमण ने एआईआईबी को भारत में राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे में निवेश का दिया निमंत्रण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बीजिंग स्थित एशियाई बुनियादी ढांचा निवेश बैंक (एआईआईबी) को भारत की महत्वकांक्षी 1,400 अरब डॉलर (करीब 111 लाख करोड़ रुपये) के बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम में भागीदारी का निमंत्रण दिया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने एआईआईबी को भारत में राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे में निवेश का दिया निमंत्रण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बीजिंग स्थित एशियाई बुनियादी ढांचा निवेश बैंक (एआईआईबी) को भारत की महत्वकांक्षी 1,400 अरब डॉलर (करीब 111 लाख करोड़ रुपये) के बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम में भागीदारी का निमंत्रण दिया।

सरकार कोविड-19 महामारी से प्रभावित आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये बुनियादी ढांचा विकास को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है। एआईआईबी के संचालन मंडल की पांचवीं सालाना बैठक में वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये अपने संबोधन में सीतारमण ने बैंक को प्रभावी परियोजना प्रबंधन और कार्यान्वयन में सहयोग के लिये क्षेत्रीय उपस्थिति दर्ज कराने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने बुनियादी ढांचा विकास को गति देने के लिये राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन (एनआईपी) 2020-2025 शुरू किया है। इसमें लगभग 1,400 अरब डॉलर का व्यय अनुमानित है। इससे एआईआईबी की भागीदारी के लिये नये निवेश के कई अवसर सृजित होंगे।’’

वित्त मंत्री ने बैंक से कुछ अपेक्षाओं का जिक्र किया, जिनमें वित्तपोषण के नए साधनों की पेशकश, 2030 तक के सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए सामाजिक आधारभूत ढांचे के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराना और कोविड-19 संकट से उबरने को लेकर मजबूत जलवायु और टिकाऊ ऊर्जा वाले बुनियादी ढांचे के विकास का एकीकरण शामिल हैं।

भारत इस बहुपक्षीय एजेंसी का संस्थापक सदस्य है और 7.65 प्रतिशत मतदान अधिकार के साथ उसके पास दूसरा सर्वाधिक वोट प्रतिशत है। वहीं 2016 में गठित एआईआईबी में चीन की हिस्सेदारी 26.63 प्रतिशत है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बैंक के भविष्य को प्रभावित करने वाले अहम फैसले लेने के लिए संचालन मंडल की हर साल बैठक होती है।

बैठक में होने वाले विचार विमर्श में एआईआईबी के अध्यक्ष के चुनाव सहित कई आधिकारिक कार्य और ‘एआईआईबी 2030- एशिया के विकास में सहायक अगला एक दशक’ विषयवस्तु पर होने वाली गोलमेज चर्चा जैसे मुद्दे शामिल थे। गोलमेज चर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में सीतारमण ने कोविड-19 महामारी से मुकाबले के लिए भारत सहित अपने सदस्य देशों को त्वरित रूप से लगभग 10 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने की दिशा में एआईआईबी के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दक्षेस देशों (सार्क) के लिए कोविड-19 आपात कोष बनाने की पहल और कोविड-19 से पार पाने में प्रमुख चिकित्सा स्वास्थ्य किट की आपूर्ति की दिशा में भारत के प्रयासों का उल्लेख किया। भारत अब कोविड-19 टीके के परीक्षण के वैश्विक प्रयासों में भी सहयोग कर रहा है।

उन्होंने कोविड-19 से मुकाबले के लिए 23 अरब डॉलर की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) और 295 अरब डॉलर का आत्म निर्भर भारत पैकेज सहित भारत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों और विभिन्न तबकों को सुरक्षा और राहत देना है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने नीतिगत पहल की और रेपो दर में कटौती की और अर्थव्यवस्था में जीडीपी का लगभग 3.9 प्रतिशत नकदी बढ़ाने के उपाय किये।
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