Frenkie de Jong की गंभीर चोट से Barcelona को बड़ा झटका, Dutch मेडिकल स्टाफ पर उठाए सवाल
UEFA Champion League के नए सीजन की शुरुआत से पहले बार्सिलोना को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। दरअसल टीम के स्टार मिडफील्डर फ्रेंकी डी जोंग के दाहिने घुटने के मेडियल कोलेटरल लिगामेंट (MCL) के फटने की पुष्टि हो गई है। इस चोट की वजह से उनके कई महीनों तक मैदान से दूर रहने की पॉसीबिलिटी है, जिससे बार्सिलोना की प्लानिंग को बड़ा झटका लगा है।
Frenkie de Jong Injury: मेडिकल स्टाफ पर जताई नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डी जोंग का मानना है कि उनकी चोट इतनी सीरियस नहीं होती अगर समय रहते सही सलाह और इलाज मिलता। उन्होंने नीदरलैंड की नेशनल टीम के मेडिकल स्टाफ पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें फीफा वर्ल्ड कप के दौरान बताया गया था कि घुटने की समस्या मामूली है और वह खेलना जारी रख सकते हैं। इसी भरोसे के चलते डी जोंग दर्द के बावजूद लगातार मैदान पर उतरते रहे। हालांकि, स्पेन लौटने के बाद जब बार्सिलोना के मेडिकल स्टाफ ने भरपूर जांच की, तब पता चला कि चोट पहले के अनुमान से कई ज्यादा सीरियस है।
जांच में सामने आई पूरी सच्चाई

बार्सिलोना ने ऑफिशियल बयान जारी कर के बताया कि क्लब के ट्रेनिंग सेंटर सियुतात एस्पोर्टिवा जोन गैम्पर में हुई मेडिकल जांच में डी जोंग के दाहिने घुटने में MCL फटने की पुष्टि हुई। फिलहाल उनका इलाज बिना सर्जरी के किया जाएगा और स्पेशलिस्ट उनकी रिकवरी पर लगातार नजर रखेंगे। क्लब ने यह भी साफ किया कि फिलहाल ऑपरेशन की प्लानिंग नहीं है। अगर रिहैबिलिटेशन के दौरान घुटने की सिचुएशन में एक्सपेक्टेड सुधार नहीं हुआ, तभी सर्जरी पर विचार किया जाएगा।
पांच से छह महीने रह सकते हैं बाहर

चोट की गंभीरता को देखते हुए फ्रेंकी डी जोंग के करीब पांच से छह महीने तक मैदान से दूर रहने की संभावना है। ऐसे में उनके 2026-27 सीजन के पहले हिस्से में खेलने की उम्मीद बेहद कम है। बार्सिलोना के मुख्य कोच हांसी फ्लिक के लिए यह बड़ी चिंता की बात है, क्योंकि डी जोंग टीम के मिडफील्ड में सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल हैं। नए सीजन में उनसे बड़े रोल निभाने की उम्मीद थी, लेकिन लंबी चोट की वजह से अब क्लब को उनके बिना अपनी प्लानिंग तैयार करनी होगी।
चोट से मैनेजमेंट पर उठे सवाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डी जोंग इस बात से निराश हैं कि वर्ल्ड कप के दौरान उनकी चोट की सही जांच नहीं की गई। उनका मानना है कि अगर शुरुआती स्टेज में सही मेडिकल सलाह दी जाती, तो चोट इतनी सीरियस नहीं बनती। अब डच नेशनल टीम के मेडिकल स्टाफ की मोडस ऑपरेंडी पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
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