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गांधी विपक्ष के इकलौते नेता राहुल गांधी हैं जो ‘‘साहसपूर्वक, निडरता के साथ बीजेपी का मुकाबला कर सकते है: अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बावजूद मोर्चा संभालना पड़ेगा क्योंकि वह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकमात्र विकल्प हैं।
गांधी विपक्ष के इकलौते नेता राहुल गांधी हैं जो ‘‘साहसपूर्वक, निडरता के साथ बीजेपी का मुकाबला कर सकते है: अशोक गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बावजूद मोर्चा संभालना पड़ेगा क्योंकि वह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकमात्र विकल्प हैं। गहलोत ने कहा कि गांधी विपक्ष के इकलौते नेता हैं जो ‘‘साहसपूर्वक और निडरता’’ के साथ मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह का मुकाबला कर सकते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने गांधी परिवार को 134 साल पुरानी पार्टी के लिए ‘‘सेतु’’ बताया और इस आरोप को खारिज कर दिया कि वह वंशवाद की राजनीति करती है। 

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बावजूद राहुल गांधी को मोर्चा संभालना पड़ेगा। वायनाड से 49 वर्षीय सांसद गांधी की तारीफ करते हुए गहलोत ने कहा कि गांधी ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान किसानों, युवाओं, बेरोजगारी और महंगाई से संबंधित अहम मुद्दे उठाए थे। गौरतलब है कि गांधी ने अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। 

एक साल पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले गहलोत ने कहा, ‘‘यह कहना गलत होगा कि मोदी के नेतृत्व का कोई विकल्प नहीं है। राहुल गांधी विकल्प हैं। यह सच है कि लोग उनसे जुड़ नहीं पाए क्योंकि मोदी की शैली और रवैया अलग है।’’ उन्होंने कहा कि गांधी ने 2017 के गुजरात चुनावों के लिए इतनी कड़ी मेहनत की कि लोगों को लगा कि भाजपा हार जाएगी। गहलोत (68) ने कहा, ‘‘लेकिन मोदी ने भावनात्मक प्रचार अभियान चलाया, मणिशंकर अय्यर की टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला। वह चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।’’ 

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दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों और उससे पहले गुजरात चुनावों के लिए व्यापक प्रचार किया। उन्होंने कहा, ‘‘केवल राहुल गांधी ही हैं जो अमित शाह और नरेंद्र मोदी को टक्कर दे सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान गांधी द्वारा उठाए गए अहम मुद्दे सर्जिकल स्ट्राइक और राष्ट्रवाद के आसपास घूमती बहस के आगे फीके हो गए। 

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राहुल गांधी को लगा कि लोग किसानों, युवाओं, बेरोजगारी, महंगाई के मुद्दों पर कांग्रेस का समर्थन करेंगे लेकिन अहम मुद्दे पीछे छूट गए और सर्जिकल स्ट्राइक तथा राष्ट्रवाद के मुद्दे छाए रहे। कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया गया। क्या हम राष्ट्रवादी नहीं हैं?’’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने केवल यह पूछा कि राफेल विमानों की खरीद 126 से घटाकर 36 क्यों कर दी गई और हर विमान का दाम 526 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,600 करोड़ रुपये क्यों कर दिया गया। 

गहलोत ने कहा, ‘‘कोई जवाब नहीं मिला। देश के पास सवाल पूछने का अधिकार है। चूंकि भाजपा चुनाव जीत गई है तो इसका यह मतलब नहीं है कि राफेल मामला बंद हो गया है। भाजपा को राफेल मुद्दे पर जेपीसी नियुक्त करने में दिक्कत क्यों हो रही है।’’ कांग्रेस के नेहरू-गांधी परिवार पर केंद्रित पार्टी होने के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने कहा कि भाजपा का एजेंडा उनकी पार्टी के नेताओं की छवि बिगाड़ने का रहा है ताकि संगठन ढह जाए लेकिन यह नहीं हुआ।

उन्होंने पूछा, ‘‘गांधी परिवार पार्टी के लिए सेतु है। पार्टी के नेताओं का परिवार पर भरोसा है तो भाजपा को कोई आपत्ति क्यों है?’’ गहलोत ने कहा कि 1989 के बाद से गांधी परिवार का कोई भी सदस्य मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं रहा तो वंशवाद की राजनीति कैसे हो सकती है? उन्होंने कहा कि पार्टी में कई योग्य नेता हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आपके पास इन योग्यताओं के प्रबंधन तथा सभी को सम्मान देने के लिए विश्वसनीयता होनी चाहिए। योग्य नेताओं का गांधी परिवार पर भरोसा है।’’ 

गहलोत ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव परिणामों के बाद भाजपा ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के बारे में बात करना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन सरकार असाधारण परिस्थितियों में सत्ता में आई। मुझे लगता है कि यह सरकार बनी रहेगी।’’ उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में लोगों ने देश के समक्ष पेश आ रहे मुद्दों पर वोट दिया न कि भाजपा के मुद्दों जैसे कि अनुच्छेद 370 और राष्ट्रवाद पर। 

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