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ग्लूकोमा लाइलाज है, समय पर उपचार ही इसका बचाव है : डा. रणधीर झा

अत्यधिक आंतरिक दबाब पडऩे की आशंका, आनुवांशिक कारण, डायबिटिज, हार्ट डिजिज, हाई बीपी और सिकल सेल एनेमिया के रोगियों को ग्लूकोमा होने की आशंका अधिक रहती है।
ग्लूकोमा लाइलाज है, समय पर उपचार ही इसका बचाव है : डा. रणधीर झा
पटना :  ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता का दूसरा प्रमुख कारण है। यह  एक लाइलाज रोग है। समय पर उपचार कराने से ही इसे बढऩे से रोका जा सकता है। ग्लूकोमा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दृष्टिपुंज नेत्रालय 8 मार्च से 8 अप्रैल तक ग्लूकोमा माह मना रहा है ताकि प्रदेश के मरीजों को इसका लाभ मिल सके।

ग्लूकोमा  विषेशज्ञ व निदेशक दृष्टिपुंज नेत्रालय डा. रणधीर झा ने बताया कि प्रमुख रूप से चार प्रकार के ग्लूकोमा से सर्वाधिक मरीज पीडि़त होते हैं जिसमें क्रॉनिक ग्लूकोमा, एक्यूट  ग्लूकोमा,  सेकेंडरी डेवलपमेन्टल  ग्लूकोमा और कॉनजेनाइटल ग्लूकोमा शामिल है। उन्होंने उपचार के संबंध में बताया कि ग्लूकोमा से  आंखों को हुई क्षति को ठीक नहीं किया जा सकता, पर इसे बढऩे से रोकना संभव है। ग्लूकोमा का उपचार आंखों में दबाब कम करके किया जाता है। मरीज की आंखों की दषा पर उपचार की दिशा निर्भर है जैसे आई ड्राप, ओरल मेडिसिन, लेजर ट्रीटमेंट और सर्जरी का विकल्प संभव है जिसका उद्वेष्य ऑप्टिक नर्भ के फ्लुइड के ड्रेनेज में सुधार कर दबाब को कम करना है।

डा. रणधीर झा ने बताया कि डब्लूएचओ के आंकड़े के अनुसार दुनिया भर में दृष्टिहीनता के 15 प्रतिशत मामले ग्लूकोमा से जुड़े हैंए साथ ही यह गौर करने लायक बात है कि इसके 90 प्रतिशत मामलों में उपचार देरी से शुरू होता है। ऐसे में जाहिर है कि आंखों में किसी भी प्रकार की परेषानी होने पर देर न करें, बल्कि चिकित्सक से सम्पर्क करें। ग्लूकोमा से जुड़े रिस्क फैक्टर के बारे में उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक के लोगों में आंखों पर अत्यधिक आंतरिक दबाब पडऩे की आशंका, आनुवांशिक कारण, डायबिटिज, हार्ट डिजिज, हाई बीपी और सिकल सेल एनेमिया के रोगियों को ग्लूकोमा होने की आशंका अधिक रहती है। 
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