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पंजाब सरकार की गाइडलाइन्स जारी - 8 जून से खुलेंगे शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थलों पर प्रसाद-लंगर बांटने पर रोक

पंजाब सरकार की ओर से शनिवार को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आठ जून से जब शॉपिंग मॉल खुलेंगे तो उनमें कपड़े पहनकर देखने पर पाबंदी रहेगी। साथ ही धार्मिक स्थलों पर प्रसाद बांटने पर भी मनाही होगी।
पंजाब सरकार की गाइडलाइन्स जारी - 8 जून से खुलेंगे शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थलों पर प्रसाद-लंगर बांटने पर रोक
पंजाब सरकार की ओर से शनिवार को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आठ जून से जब शॉपिंग मॉल खुलेंगे तो उनमें कपड़े पहनकर देखने पर पाबंदी रहेगी। साथ ही धार्मिक स्थलों पर प्रसाद बांटने पर भी मनाही होगी। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार मॉल में प्रवेश के लिये टॉकन दिया जाएगा। धार्मिक स्थल सुबह पांच बजे से रात आठ बजे तक खुले रहेंगे। 
इसके अलावा धार्मिक स्थलों पर प्रसाद बांटने और लंगर लगाने पर पाबंदी रहेगी। पंजाब सरकार ने आठ जून से खोले जा रहे शॉपिंग मॉल, रेस्त्रां, होटलों और धार्मिक स्थलों को लेकर यह दिशा-निर्देश जारी किये हैं। 
मॉल आने वाले लोगों के मोबाइल फोन में कोरोना वायरस अलर्ट (सीओवीए) ऐप होना चाहिये। हालांकि अगर किसी परिवार के एक सदस्य के मोबाइल में यह ऐप मौजूद होगा तो उस परिवार को मॉल में प्रवेश करने दिया जाएगा। इन सभी स्थानों पर सामाजिक मेलजोल से दूरी और साफ-सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। 
वहीं, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान भाई गोबिन्द सिंह लोंगोवाल ने सरकार की तरफ से आठ जून से धार्मिक स्थान खोलने सम्बन्धित जारी किये दिशा निर्देशों में लंगर और प्रसाद की मनाही पर शनिवार को नाराजगी प्रकट करते हुए सरकार से इसपर पुनर्विचार करने की मांग की। 
भाई लोंगोवाल ने कहा कि लंगर और कड़ह प्रसाद गुरुद्वारा साहब की मर्यादा का अहम अंग है, जिस पर मनाही जायज नहीं है। उन्होने कहा कि गुरूघरों से तो कोरोना दौरान भी जरूरतमंदों के लिए लंगर सेवा की जाती रही है। सरकार और सेहत विभाग के निर्देशों अनुसार ही यह सेवा जारी रही, परंतु अब सरकार की तरफ से जारी दिशा निर्देशों में लंगर और प्रसाद की मनाही की बात कही जा रही है। 
एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि गुरूद्वारों में लंगर के समय पूरी तरह सा़फ स़फाई रखी जाती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जाता है। उन्होने सरकार से मांग की है कि लंगर और कड़ह प्रसाद की मनाही के फैसले बारे पुन: विचार किया जाए।
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