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Haryana Exclusive Update: बाइक पर विधायक, हाथ में झुनझुना!" जानिए क्यों चर्चा में हैं गुहला विधायक देवेंद्र हंस, पढ़िए पूरा एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

05:37 PM Aug 30, 2026 IST | Pankhil Verma
haryana exclusive update  बाइक पर विधायक  हाथ में झुनझुना   जानिए क्यों चर्चा में हैं गुहला विधायक देवेंद्र हंस  पढ़िए पूरा एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
Haryana Exclusive Update

हरियाणा की राजनीति में अपनी सादगी और कड़े तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले विधायक देवेंद्र हंस (एमएलए बुल्ला) ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान अपने व्यक्तिगत जीवन, प्रशासनिक अनियमितताओं और प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर खुलकर चर्चा की। प्रस्तुत है साक्षात्कार के मुख्य अंशों पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट:

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सादगी की मिसाल: सुरक्षा तंत्र और औरा से दूर, 2006 मॉडल स्पलेंडर से जनता के बीच

आमतौर पर विधायकों और जनप्रतिनिधियों के साथ चलने वाले गनमैन, पीसीआर और बड़े सुरक्षा काफिले के विपरीत, देवेंद्र हंस आज भी अपनी 2006 मॉडल की हीरो स्पलेंडर मोटरसाइकिल से ही अपने क्षेत्र में घूमते हैं।

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* *जनसेवा का संकल्प: देवेंद्र हंस ने बताया कि राजनीति में आने का उनका प्राथमिक उद्देश्य केवल जनसेवा करना था, न कि आम जनता से दूरी बनाना। वे मानते हैं कि सुरक्षा का बेजा प्रदर्शन प्रतिनिधि और जनता के बीच दूरी पैदा करता है।

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* *दैनिक दिनच*र्या: सुबह 6 बजे उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद वे बिना किसी औपचारिक लश्कर के सीधे मोटरसाइकिल उठाकर जनता के बीच उनकी समस्याएं सुनने निकल जाते हैं।

प्रशासनिक धांधली पर कड़ा रुख: अधिकारी को 'झुनझुना' सौंपने की पूरी कहानी

हाल ही में प्रशासनिक बैठकों के दौरान एक अधिकारी को 'झुनझुना' पकड़ाने का उनका वीडियो काफी चर्चित रहा था। विधायक ने इसके पीछे की वजह का खुलासा किया:

* *गुहला-चीका में निर्माण कार्य में गड़बड़ी: *ब्लॉक समिति की दुकानों के नवीनीकरण (Renovation) के प्रस्ताव में 7 दुकानों की जगह 8 दुकानों का प्रस्ताव दिखाया गया, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की साजिश करार दिया।

* अधिकारियों की लापरवाही: एसडीएम व संबंधित अधिकारियों द्वारा स्पष्ट जवाब न देने और बिना विधिक स्थिति तय किए निर्माण कार्य जारी रखने के विरोध स्वरूप उन्होंने सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। हंस ने कहा कि अगर अधिकारी सही काम करेंगे तो उन्हें फूल दिए जाएंगे, और लापरवाही बरतने पर इसी तरह विरोध झेला जाएगा।

संघर्षों से भरा शुरुआती जीवन और राजनीतिक सफर

विधायक ने अपने पारिवारिक और वित्तीय संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि वे एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं:

* पिता का सैन्य पृष्ठभूमि: उनके पिता 1965 के युद्ध के सैनिक थे और परिवार का गुजारा मुख्य रूप से उनकी पेंशन (~₹6,000) से ही चलता था।

* व्यवसाय से राजनीति: राजनीति में आने से पूर्व वे रेफ्रिजरेशन मरम्मत की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि उनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना पड़ा।

* 2019 का निर्णायक मोड़: 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर उन्होंने लगभग 29,800 वोट हासिल किए थे, जिसने उनके राजनीतिक करियर को नई दिशा दी। 2024 के चुनाव में जनता ने उन्हें 65,000 से अधिक वोट देकर विधानसभा भेजा।

संगठन, चुनाव परिणाम और ईवीएम/वोटिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल

विधानसभा चुनावों के परिणामों पर चर्चा करते हुए विधायक देवेंद्र हंस ने पार्टी के अंदरूनी बयानों और चुनावी प्रक्रिया पर विचार रखे:

* मतदान आंकड़ों में अंतर: उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दिन शाम को पोलिंग प्रतिशत और अगली सुबह के अंतिम आंकड़ों में लगभग 7% की वृद्धि दर्ज की गई, जो औसतन हर सीट पर 15,000 वोटों के फेरबदल की ओर इशारा करती है।

* *टिकट वितरण और जमीनी नेतृत्*व: उन्होंने स्वीकार किया कि चुनाव से पूर्व कुछ नेताओं के विवादित बयानों से पार्टी को नुकसान हुआ। साथ ही, उन्होंने कहा कि फील्ड में निष्ठा से काम करने वाले जिताऊ उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।

मुल्ला गांव की पंचायती भूमि विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई

गुहला विधानसभा के मुल्ला गांव में 10.5 एकड़ पंचायती जमीन की बोली में हुई धांधली के मामले पर विधायक ने प्रशासनिक फैसले का समर्थन किया:

* गरीबों के हक की लड़ाई: उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति वर्ग के हिस्से की जमीन पर अवैध तरीके से रसीदें काटी गईं और फर्जी कागजातों (आधार कार्ड एड्रेस बदलाव) के जरिए कब्जा करने का प्रयास किया गया।

* उपमंडल अधिकारी का धन्यवाद: एसडीएम द्वारा इस मामले में लिए गए न्यायसंगत फैसले की उन्होंने सराहना की और कहा कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों को जनता माफ नहीं करेगी।

एचकेआरएन (HKRN) और रोजगार नीति पर सरकार की घेराबंदी

हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने निम्नलिखित बिंदु रखे:

* पक्की नौकरी की मांग: विधायक ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का उद्देश्य एचकेआरएन कर्मचारियों को हटाना नहीं, बल्कि उन्हें समान काम के लिए समान वेतन देते हुए नियमित (पक्का) करना है।

* आरक्षण और पारदर्शिता का अभाव: उन्होंने आरोप लगाया कि एचकेआरएन के माध्यम से एससी और बीसी वर्ग का आरक्षण प्रभावित हो रहा है और इस व्यवस्था में भारी पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार है।

संसदीय निष्ठा और प्रलोभनों पर बेबाक बयान

साक्षात्कार के अंत में विधायक देवेंद्र हंस ने राजनीतिक सौदेबाजी और राज्यसभा व अन्य अवसरों के दौरान मिले प्रलोभनों का जिक्र किया:

* करोड़ों के ऑफर का दावा: उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीतिक हलचलों के दौरान उन्हें पाला बदलने या समर्थन देने के लिए करोड़ों रुपये के ऑफर दिए गए थे।

* * जमीर और जनसमर्थन की प्राथमिकता*: हंस ने कहा, "मेरा जमीर नहीं माना। मैं जिस पृष्ठभूमि से आया हूँ, वहां संघर्ष देखा है। गुहला की जनता और पार्टी नेतृत्व ने जो मान-सम्मान दिया है, उसे मैं पैसों के लिए कभी नहीं बेच सकता।"

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Pankhil Verma

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