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उत्तराखंड : चारधाम यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों की मौत पर HC ने धामी सरकार से मांगा जवाब

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा में फैली अव्यवस्थाओं और लगातार हो रही घोड़ों-खच्चरों की मौतों के मामले में धामी सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड : चारधाम यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों की मौत पर HC ने धामी सरकार से मांगा जवाब
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा में फैली अव्यवस्थाओं और लगातार हो रही घोड़ों-खच्चरों की मौतों के मामले में धामी सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आज हुई सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा है कि चारधाम यात्रा में घायल जानवरों को रखने की क्या व्यवस्था है और अनफिट जानवरों का क्या हुआ? कब तक एसओपी को लागू किया जाएगा। कुल कितने लोगों और घोड़े-खच्चरों को जाने की अनुमति एक दिन में दी जा सकती है। 
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर आज सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि उन्होंने पशु चिकित्सकों के साथ अन्य सुविधाओं को बढ़ाया है। यात्रा मार्ग पर पानी की व्यवस्था करने के साथ घायल घोड़ों की देखरेख की जा रही है। कोर्ट में इस संबंध में एसओपी अभी शासन में लंबित है जिस पर निर्णय लिया जाना है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि बदरीनाथ के लिए 16 हजार, केदारनाथ 13 हजार, गंगोत्री आठ यमुनोत्री के लिए 5 हजार प्रतिदिन श्रद्धालु भेजने का प्रस्ताव है। सरकार घोड़ापड़ाव गौरीकुंड में 500 जानवरों के लिए शेल्टर बना रही है और केदारनाथ लिनचोली में हजार-हजार लीटर के दो सोलर गीजर स्थापित कर दिए गए हैं। कोर्ट इन व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं हुई और सरकार से कहा कि वह विस्तृत शपथपत्र पेश करे।
क्या है मामला
दरअसल, देहरादून निवासी समाजसेवी गौरी मौलेखी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि चारधाम यात्रा में अब तक 600 घोड़ों की मौत हो चुकी है। उस इलाके में बीमारी फैलने का खतरा बन गया है। जानवरों और इंसानों की सुरक्षा के साथ उनको चिकित्सा सुविधा दी जाए।
चारधाम यात्रा में भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है जिससे जानवरों और इंसानों को दिक्कतें आ रही हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से मांग की गई कि यात्रा में क्षमता के हिसाब से लोगों को भेजा जाए। उतने ही लोगों को अनुमति दी जाए जितने लोगों को खाने-पीने और रहने की सुविधा मिल सके।

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