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Deja Vu Kya Hota Hai: भूतिया साया या दिमाग की जादुई चाल? जानिए दुनिया के 70% लोगों को महसूस होने वाले डेजा वू की असली वजह

12:26 PM Jul 03, 2026 IST | Kajal Yadav
deja vu kya hota hai  भूतिया साया या दिमाग की जादुई चाल  जानिए दुनिया के 70  लोगों को महसूस होने वाले डेजा वू की असली वजह
Deja Vu Kya Hota Hai (Source: AI)

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी नई जगह पर जाएं, किसी से पहली बार मिलें, या कोई काम पहली बार कर रहे हों, लेकिन अचानक आपको ऐसा लगने लगता है कि 'अरे, ये सब तो मेरे साथ पहले भी हो चुका है। इस अजीब और जाने-पहचाने अहसास को ही डेजा वू (Deja vu) कहा जाता है। ये एक फ्रेंच शब्द है, जिसका मतलब होता है 'पहले ही देखा हुआ'। ऐसे में आइए इसके बारे में समझते हैं कि डेजा वू के पीछे का सच क्या है।

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सच में क्या डेजा वू असली है?

Deja vu phenomenon
Deja vu phenomenon (Source: Social Media)

डेजा वू बिल्कुल असली है और दुनिया के 60 से 70% लोग अपनी जिंदगी में कभी न कभी इसका सामना जरूर करते हैं। ये कोई जादू या भूतिया साया नहीं है, बल्कि इंसानी दिमाग की एक बहुत ही नार्मल और स्थिति है। ये एहसास कुछ ही सेकंड के लिए होता है, लेकिन इंसान को सोच में डाल देता है।

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डेजा वू फेनोमेनन क्यों होता है?

वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के अनुसार, डेजा वू फेनोमेनन हमारे दिमाग की एक छोटी सी परेशानी के कारण होता है। जब हम किसी चीज को देखते हैं, तो हमारा दिमाग उसे प्रोसेस करता है और यादों की तरह सेफ करता है। लेकिन कभी-कभी दिमाग के दो हिस्सों के बीच तालमेल में कुछ समय लग जाता है। इसके कारण जो घटना अभी-अभी घट रही है, हमारा दिमाग हमें ये सिग्नल दे देता है कि ये तो एक पुरानी याद है।

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क्या कहता है विज्ञान?

Deja vu theory parallel universe
Deja vu theory parallel universe (Source: Social Media)
  • जब हम किसी चीज पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं, तब हमारा Subconscious Mind उसे पहले ही रिकॉर्ड कर लेता है। जब हम कुछ सेकंड बाद उस पर पूरा ध्यान देते हैं, तो वो हमें पुरानी घटना जैसी लगती है।
  • कभी-कभी हम किसी ऐसी जगह पर होते हैं, जो हमारी बचपन की किसी भूली-बिसरी जगह से मिलती-जुलती होती है। हमारा दिमाग उस पुरानी याद को पूरी तरह पहचान नहीं पाता है, इसलिए हमें वह पूरा नजारा ही जाना-पहचाना सा लगने लगता है।
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Kajal Yadav

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काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।

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