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650 करोड़ के हेल्थ स्कैम में नया मोड़, पूर्व एक्टिंग डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल ने सरकारी गवाह बनने की जताई इच्छा

08:38 PM Jul 12, 2026 IST | Avinay
650 करोड़ के हेल्थ स्कैम में नया मोड़  पूर्व एक्टिंग डीजीएचएस डॉ  वत्सला अग्रवाल ने सरकारी गवाह बनने की जताई इच्छा
Delhi : 650 करोड़ के हेल्थ स्कैम में नया मोड़, पूर्व एक्टिंग डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल ने सरकारी गवाह बनने की जताई इच्छा

Delhi : दिल्ली के बहुचर्चित 650 करोड़ रुपये के दवा एवं चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच में नया मोड़ सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी और स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय (डीजीएचएस) की पूर्व कार्यवाहक महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल ने अदालत और जांच एजेंसियों के समक्ष सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की इच्छा जताई है।

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सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर इस पूरे मामले में एक बड़े सिंडिकेट और कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की ओर संकेत किया है। फिलहाल एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के माध्यम से हुई खरीद की जांच कर रहे हैं।

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जांच एजेंसियों के अनुसार, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। आरोप है कि ओआरएस के पैकेट, अस्पतालों की चादरें, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, सी-आर्म मशीन और एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए।

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विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि जिन पांच अस्पतालों ने इन उपकरणों की आवश्यकता से इनकार किया था, वहां भी सामान भेजकर विशेष स्टोर बनाकर रखा गया। इंदिरा गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का नाम प्रमुख रूप से जांच के दायरे में है।

जांच में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके हासिल करने वाली एक कंपनी का निदेशक स्वास्थ्य विभाग के एक डॉक्टर का घरेलू नौकर निकला। एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किस स्तर तक मिलीभगत हुई।

स्वास्थ विभाग के नेतृत्व में लगातार बदलाव से घोटाले का शक गहराया

इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय में पिछले डेढ़ से दो वर्षों के दौरान नेतृत्व में लगातार बदलाव भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जनवरी 2025 में तत्कालीन डीजीएचएस डॉ. वंदना बग्गा के निलंबन के बाद डॉ. राजेश कुमार, डॉ. रति मक्कर, फिर दोबारा डॉ. राजेश कुमार, उसके बाद डॉ. वत्सला अग्रवाल और वर्तमान में डॉ. सुषमा जैन को अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई।

लगातार बदलते नेतृत्व के बावजूद सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और खरीद प्रणाली पर सवाल बने हुए हैं। इनमें डॉ. राजेश कुमार ने तो ज्वाइन करने के कुछ दिन बाद खुद ही हट गए। उधर, जांच एजेंसियां इस मामले में सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और अब सभी की नजर आगे की कानूनी कार्रवाई तथा जांच के निष्कर्षों पर टिकी है।

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