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सेल और जीन थेरेपी पर कड़ी होगी निगरानी, केंद्र ने ड्रग्स रूल्स-1945 में किया बड़ा संशोधन

09:16 PM Jul 02, 2026 IST | Avinay
सेल और जीन थेरेपी पर कड़ी होगी निगरानी  केंद्र ने ड्रग्स रूल्स 1945 में किया बड़ा संशोधन
Drugs Rule : सेल और जीन थेरेपी पर कड़ी होगी निगरानी, केंद्र ने ड्रग्स रूल्स-1945 में किया बड़ा संशोधन

Drugs Rule : उन्नत चिकित्सा तकनीकों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में अहम संशोधन किया है। इसके तहत सेल या स्टेम सेल से प्राप्त उत्पादों, जीन थेराप्यूटिक उत्पादों और जेनोग्राफ्ट्स को केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (सीएलएए) के दायरे में शामिल कर लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य देशभर में इन अत्याधुनिक उपचारों के लिए एक समान नियामकीय व्यवस्था लागू करना और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करना है।

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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत पहले से ही टीकों, बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले पैरेंटेरल (100 मिलीलीटर से अधिक आईवी सॉल्यूशन) और आर-डीएनए आधारित दवाओं जैसी महत्वपूर्ण श्रेणियां केंद्र और राज्य नियामक एजेंसियों की संयुक्त निगरानी में हैं। अब इसी व्यवस्था का विस्तार करते हुए नई पीढ़ी की सेल और जीन आधारित चिकित्सा तकनीकों को भी इसमें शामिल किया गया है।

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कार-टी सेल थेरेपी का उपयोग ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में तेजी से प्रचलन

विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेम सेल आधारित पुनर्योजी उपचार (रिजेनरेटिव थेरेपी) और कार-टीसेल थेरेपी का उपयोग ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, जीन रिप्लेसमेंट और जीन एडिटिंग तकनीकों का इस्तेमाल आनुवंशिक बीमारियों और कई प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जा रहा है। इसके अलावा, जानवरों के ऊतकों से तैयार जेनोग्राफ्ट्स, जैसे हार्ट वाल्व, कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किए जाते हैं।

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ये सभी तकनीकें अत्यधिक जटिल, विशेषज्ञता आधारित और तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र

सरकार का कहना है कि ये सभी तकनीकें अत्यधिक जटिल, विशेषज्ञता आधारित और तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र हैं। ऐसे में इनके निर्माण, गुणवत्ता और उपयोग की सख्त वैज्ञानिक जांच आवश्यक है। सीएलएए के तहत इन्हें शामिल करने से केंद्र और राज्य स्तर पर संयुक्त नियामकीय निगरानी मजबूत होगी तथा पूरे देश में लाइसेंसिंग और गुणवत्ता मानकों में एकरूपता सुनिश्चित की जा सकेगी।

केंद्र का मानना है कि यह संशोधन एक ओर मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवा और लाइफ साइंस क्षेत्र में नवाचार तथा अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने में भी मददगार साबित होगा। सरकार ने संशोधित नियमों का विस्तृत गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

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