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भारत में हर चौथे व्यक्ति का बढ़ा कोलेस्ट्रॉल, समय पर जांच और सही इलाज से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

07:29 PM Jul 16, 2026 IST | Avinay
भारत में हर चौथे व्यक्ति का बढ़ा कोलेस्ट्रॉल  समय पर जांच और सही इलाज से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा
High Cholesterol in India

High Cholesterol : भारत में बढ़ते हृदय रोगों के बीच कोलेस्ट्रॉल एक बड़ी चिंता बनकर उभर रहा है। फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर चार में से एक व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य से अधिक है, जिससे हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक मौतें हृदय संबंधी बीमारियों के कारण होती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ समय पर जांच और सही उपचार को सबसे प्रभावी बचाव मान रहे हैं।

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कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के मुताबिक, 17 वर्ष की आयु से ही ब्लड टेस्ट के साथ कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। हालांकि जांच रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा होने का मतलब यह नहीं कि हर मरीज को तुरंत दवा शुरू करनी पड़े।

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उपचार का फैसला व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, मधुमेह, हृदय रोग के जोखिम और एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को देखकर किया जाता है।

जीबी पंत अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. सफल के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को हृदय रोग या मधुमेह नहीं है और उसका एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 100 से 159 के बीच है तो 8 से 12 सप्ताह तक संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तंबाकू से दूरी बनाकर कई मामलों में बिना दवा के भी कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए अनुशासित जीवनशैली अपनाना जरूरी है।

यदि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 190 या उससे अधिक हो तो दवा लेने की सलाह

एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीतीश नायक बताते हैं कि यदि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 190 या उससे अधिक हो तो अधिकांश वयस्कों को स्टैटिन दवा शुरू करने की सलाह दी जाती है, वहीं 40 से 75 वर्ष की आयु के मधुमेह रोगियों में, यदि एलडीएल 70 या उससे अधिक है तो भी दवा की आवश्यकता पड़ सकती है।

जिन मरीजों को पहले हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, बाईपास सर्जरी या स्ट्रोक हो चुका है, उनमें एलडीएल का लक्ष्य 55 से नीचे रखना आवश्यक माना जाता है।

डॉ. सफल सलाह देते हैं कि कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट में केवल टोटल कोलेस्ट्रॉल नहीं, बल्कि एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल), एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर पर भी ध्यान देना चाहिए। सामान्यतः टोटल कोलेस्ट्रॉल 200 से कम और एलडीएल 100 से कम होना बेहतर माना जाता है। यदि एलडीएल 190 से अधिक हो तो बिना देरी किए हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार अपनाकर हृदय रोगों और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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