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Himachal Polls: नेताओं की बगावत से भाजपा-कांग्रेस को नुकसान! तीसरा दल उठा सकती है लाभ

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होना है। इस बार बागी नेताओं की समस्या दोनो दलों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं।

03:16 PM Nov 11, 2022 IST | Desk Team

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होना है। इस बार बागी नेताओं की समस्या दोनो दलों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होना है। इस बार बागी नेताओं की समस्या दोनो दलों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का अवसर मिला था। राज्य में सत्ता परिवर्तन का लंबा इतिहास रहा है। भाजपा ने सरकार रिपीट करने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार बनने की उम्मीद है। अगर बात करें सर्वे कि तो भाजपा को एकबार फिर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाते दिखाया जा रहा है। दावा यह भी किया जा रहा कि बागी नेता भाजपा-कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी इसका लाभ उठाकर कुछ सीटों पर कामयाबी हासिल कर सकती है। 
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बागी नेता पार्टी की जीत में बन सकते है रोड़ा
पहाड़ी राज्य की कुल 68 विधानसभा सीटों में से भाजपा के 21 बागी नेताओं ने नामांकन पत्र भरा है। इन नेताओं में मुख्य रूप से कृपाल परमार हैं, जिन्हें कभी भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का करीबी माना जाता था। कृपाल इस बार कांगड़ा जिले की फतेहपुर सीट से चुनावी मैदान में हैं। वह आरोप लगाते हैं कि उन्हें टिकट न मिलने के पीछे नड्डा का हाथ है। फतेहपुर सीट से भाजपा ने परमार की जगह राकेश पठानिया को चुनावी रण में उतारा है। वहीं कांग्रेस की ओर से भवानी सिंह पठानिया मैदान में है ।पिछले विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर भाजपा ने बहुत कम मार्जिन से जीत हासिल की थी। ऐसे में बागी नेता पार्टी की जीत में रोड़ा बन सकते है।
भाजपा ही नहीं विपक्षी कांग्रेस भी बागी नेताओं की चुनौतियों से जूझ रहीं है। सुल्लाह सीट से पूर्व विधायक जगजीवन पाल इस बार निर्दलय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे हैं। आपको बता दें कि पाल दो बार विधायक रह चुके हैं। वह कांग्रेस प्रत्याशी जगदीश सपेहिया के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। भाजपा के मौजूदा विधायक विपिन सिंह परमार ने 2017 के चुनाव में जगजीवन पाल को मात दिया था। भाजपा ने एक बार फिर परमार को मैदान में उतारा है। 
चुनौतियों से जूझते सियासी दल
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृह जिले बिलासपुर में भी पार्टी को बगावत का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा उम्मीदवार और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के करीबी त्रिलोक जामवाल के खिलाफ सुभाष शर्मा लड़ रहे हैं। बिलासपुर सीट से कांग्रेस भी तिलक राज की बगावत का सामना कर रही है। बता दें कि जिले की जनदुत्ता सीट से बीरू राम किशोर भी कांग्रेस से बगावत कर चुके हैं। भाजपा-कांग्रेस से नेताओं की बगावत तीसरे मोर्चे को पनपने में मदद कर सकती है।    

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