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एआई गरीबों के प्रति अंतर्निहित पूर्वाग्रह दिखा रहा है : सीजेआई सूर्यकांत

11:40 PM May 06, 2026 IST | IANS
एआई गरीबों के प्रति अंतर्निहित पूर्वाग्रह दिखा रहा है   सीजेआई सूर्यकांत
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नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने, इस बात पर जोर देते हुए कि सामाजिक न्याय एक मानवीय और न्यायसंगत समाज की आधारशिला बनी रहनी चाहिए, बुधवार को आगाह किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से बढ़ता चलन गरीबों के प्रति एक अंतर्निहित पूर्वाग्रह प्रदर्शित कर रहा है।

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'रिस्पेक्ट इंडिया' द्वारा आयोजित 'रश्मिरथी: सामाजिक न्याय का महाकाव्य' विषय पर आठवें दिनकर स्मृति व्याख्यान में सीजेआई ने कहा कि समानता और मानवीय गरिमा के आदर्शों को रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचनाओं में संविधान में शामिल किए जाने से भी पहले सशक्त अभिव्यक्ति मिली थी।

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सीजेआई ने दिनकर के महाकाव्य 'रश्मिरथी' से सीख लेते हुए कहा कि एक लोकतंत्र में समानता, गरिमा और सामाजिक सौहार्द अनिवार्य हैं। केवल कानून बना देना ही काफी नहीं है, जब तक कि हर व्यक्ति के साथ गरिमा और सम्मान का व्यवहार न किया जाए।

समाज में बनी हुई असमानताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सात दशक बीत जाने के बाद भी, दिनकर की रचनाओं में जिन विषमताओं को उजागर किया गया था, वे आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई हैं।

सीजेआई ने आगे कहा कि सामाजिक न्याय के आदर्श और उसका अभ्यास एक न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था की नींव बनाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि उभरती हुई टेक्नोलॉजी, जिसमें एआई-आधारित सिस्टम भी शामिल हैं, अगर संवैधानिक मूल्यों और मानवीय संवेदनशीलता से निर्देशित न हों, तो वे सामाजिक बहिष्कार को और गहरा करने का जोखिम पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि साहित्य और संवैधानिक नैतिकता मिलकर समाज में समानता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए एक स्थायी ढांचा प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर, कवि की विरासत को बढ़ावा देने में उनके योगदान की पहचान के तौर पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी को 'दिनकर संस्कृति सम्मान 2026' से सम्मानित किया गया।

उन्होंने कहा कि दिनकर जी की कविताएं आज भी हमें प्रेरित करती हैं और हमारी सांस्कृतिक विरासत की शक्ति को दर्शाती हैं।

इस स्मारक व्याख्यान में न्यायपालिका, शिक्षा जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विकास सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि दिनकर के लेखन में न्याय के उन बुनियादी सिद्धांतों की झलक मिलती है, जिनकी जड़ें भारत की सभ्यतागत चेतना में गहरी जमी हुई हैं। यह मंच साहित्यिक विचारों को समकालीन कानूनी और सामाजिक विमर्श से जोड़ता है।

'रिस्पेक्ट इंडिया' के संस्थापक और महासचिव मनीष कुमार चौधरी ने कहा कि यह स्मारक व्याख्यान दिनकर की उस चिरस्थायी विरासत और विचारों के प्रति एक श्रद्धांजलि है, जो आज भी कई पीढ़ियों को प्रेरित करते आ रहे हैं। हम चाहते हैं कि यह मंच संस्कृति, विचारों और सामाजिक दायित्व को एक साथ लाए।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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