दक्षिण तट रेलवे योजना के तहत ओडिशा का कोई क्षेत्र कम नहीं होगा
भुवनेश्वर, 6 मई (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने बुधवार को एक बार फिर स्पष्ट किया कि दक्षिण तट रेलवे के निर्माण से ओडिशा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा, और इसके विपरीत सुझाव देने वाली रिपोर्टों को भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया।
अधिकारियों ने कहा कि यह स्पष्टीकरण उन व्यापक रूप से प्रसारित रिपोर्टों के जवाब में जारी किया गया था जिनमें दावा किया गया था कि नए दक्षिण तटीय रेलवे क्षेत्र के गठन के कारण ओडिशा को काफी नुकसान होगा।
रेलवे ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि इन्हें निहित स्वार्थ वाले व्यक्तियों और समूहों द्वारा फैलाया जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नवगठित साउथ कोस्ट रेलवे के विशाखापत्तनम डिवीजन में पलासा से इच्छापुरम तक 53 किलोमीटर का विस्तार शामिल है, जिसमें सात स्टेशन शामिल हैं -पलासा, सुमादेवी, मंदासा रोड, बरुवा, सोमपेटा, झाडूपुडी और इच्छापुरम ये सभी आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित हैं।
रेलवे ने कहा कि इससे स्पष्ट रूप से यह साबित होता है कि ओडिशा का कोई भी हिस्सा आंध्र प्रदेश को हस्तांतरित नहीं किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय हानि के दावे निराधार हो जाते हैं।
इस बीच, कोरापुट-सिंगापुर रोड, कोठावलासा-किरंदुल, कुनेरू-थेरुबली और गुनुपुर-परालाखेमुंडी खंडों सहित कुल 696 किलोमीटर रेलवे मार्ग, ईस्ट कोस्ट रेलवे के नवगठित रायगड़ा डिवीजन के अंतर्गत बने रहेंगे।
रेलवे ने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में ओडिशा के किसी भी हिस्से को आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में नहीं लाया जा रहा है।
इसने जनता से यह भी आग्रह किया कि वे निराधार और जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचनाओं से गुमराह न हों।
बता दें कि केंद्र सरकार ने हाल ही में एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर 1 जून, 2026 से विशाखापत्तनम में मुख्यालय के साथ दक्षिण तट रेलवे जोन की स्थापना की है।
दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) और पूर्वी तट रेलवे (ईसीआर) के पुनर्गठन के बाद, नए जोन में गुंटकल, गुंटूर, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम जैसे प्रभाग शामिल होंगे, जिससे आंध्र प्रदेश की लंबे समय से लंबित मांग पूरी होगी।
हालांकि, इस कदम से ओडिशा में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें बीजद, कांग्रेस, वामपंथी दलों और कई अन्य विपक्षी समूहों ने पलासा-इच्छपुरम खंड को दक्षिण तटीय रेलवे (एससीओआर) को हस्तांतरित करने के फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
--आईएएनएस
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