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पूर्वी भारत के विकास की कुंजी कोलकाता का पुनरुद्धार: संजीव सान्याल

06:16 PM May 06, 2026 IST | IANS
पूर्वी भारत के विकास की कुंजी कोलकाता का पुनरुद्धार  संजीव सान्याल
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मुंबई, 6 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के सदस्य संजीव सान्याल ने बुधवार को कहा कि कोलकाता को एक विकास केंद्र के रूप में पुनर्जीवित करना भारत के पूर्वी हिस्से के विकास के लिए बेहद अहम है, जो देश के पश्चिमी हिस्से की तुलना में 'काफी गरीब' है।

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में आयोजित 'भारतीय राज्यों के सापेक्ष आर्थिक प्रदर्शन' विषय पर कार्यक्रम के दौरान सान्याल ने पत्रकारों से कहा कि भारतीय राज्यों के प्रदर्शन में कुछ स्पष्ट रुझान देखने को मिलते हैं।

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उन्होंने कहा, "देश में अक्सर उत्तर-दक्षिण विभाजन की चर्चा होती है, लेकिन असली आर्थिक चुनौती वह नहीं है। असल समस्या पूर्व-पश्चिम विभाजन है, जहां भारत का पूर्वी हिस्सा पश्चिमी हिस्से की तुलना में काफी अधिक गरीब है।"

उन्होंने आगे कहा कि पूर्वी भारत के विकास को गति देने की कुंजी कोलकाता का पुनरुद्धार है, क्योंकि देश में तेज आर्थिक विकास कुछ चुनिंदा बड़े शहरों और विकास केंद्रों के जरिए ही आगे बढ़ता है। ऐसे में पूर्वी भारत को भी एक मजबूत विकास केंद्र की जरूरत है।

सान्याल ने कहा, "कोलकाता के पास पहले से ही कुछ औद्योगिक क्लस्टर और समृद्ध इतिहास है। पिछले 50 वर्षों में गिरावट के बावजूद, मेरा मानना है कि पूर्वी भारत के पुनरुद्धार का रहस्य कोलकाता के पुनर्जीवन में ही है।"

इसी बीच, उद्योगपति संजीव गोयनका ने भी पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को लेकर उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि अगर राज्य में स्थिर सरकार बनती है, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और नए निवेश आकर्षित होंगे।

एनडीटीवी से बातचीत में आरपीएसजी ग्रुप के चेयरमैन गोयनका ने कहा कि अब ध्यान बंगालियों के बाहर पलायन की चिंता से हटाकर राज्य में प्रतिभा और पूंजी को आकर्षित करने पर होना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि ऐसा बिजनेस-फ्रेंडली माहौल बनाया जाए, जहां व्यक्ति और कंपनियां दोनों निवेश करने और बसने के लिए प्रेरित हों।

कोलकाता में जन्मे और पले-बढ़े गोयनका ने कहा कि राज्य के विकास में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी है और वे इसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि उद्योग के लिए नीतिगत स्थिरता बेहद जरूरी है, क्योंकि बार-बार नियमों में बदलाव या उलटफेर लंबे समय के निवेश फैसलों को प्रभावित करते हैं।

गोयनका ने ढांचागत सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया और शहरी भूमि सीमा जैसे पुराने नियमों की आलोचना करते हुए उन्हें विकास में बाधा बताया।

--आईएएनएस

डीबीपी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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