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सबका मंगल होये रे...

इस समय सारा विश्व महामारी की चपेट में है। भय और अवसाद का माहौल है क्योंकि यह महामारी कोई अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा नहीं देखती न जाने किस रूप में किसको अपने गले लगा ले।
सबका मंगल होये रे...
इस समय सारा विश्व महामारी की चपेट में है। भय और अवसाद का माहौल है क्योंकि यह महामारी कोई अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा नहीं देखती न जाने किस रूप में किसको अपने गले लगा ले। बहुत बड़े-बड़े सैलिब्रिटीज, गायक, एक्टर अपने-अपने तरीके से इस समय सबका मॉरल बूस्ट कर रहे हैं, सबका साहस बढ़ा रहे हैं। अपना सामाजिक कत्र्तव्य निभा रहे हैं। यही नहीं हमारे वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब के सदस्य अपने तरीके से वीडियो अपलोड करके एक प्रतियोगिता के तहत लोगों का हौंसला बढ़ा रहे हैं। इस डिप्रेशन भरे माहौल को खुशनुमा बना रहे हैं। हमारे क्लब से सभी प्रसिद्ध गायक हंसराज हंस, जसबीर जस्सी, शंकर साहनी, दिलेर महेंदी, मिक्का, हनी सिंह, नरेन्द्र चंचल जी जुड़े हैं, समय-समय पर अपनी सेवाएं देते रहते हैं। पिछले साल से हमारे साथ प्रसिद्ध भजन गायक सिद्धार्थ मोहन जी जुड़े हैं। जिन्होंने अपनी मधुर आवाज और नूरानी चेहरे से लाखों लोगों को चाहे वो देश के हों या विदेशों के अमेरिका, लंदन, अफ्रीका सब जगह से जुड़े हैं। उनके जुडऩे से पंजाब केसरी के सभी प्लेटफॉर्म चाहे वो यूथ का है, महिलाओं का, बच्चों का है या वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब का, बहुत ही खुश हैं। उन्होंने शिवराित्र और अश्विनी जी की याद में प्रोग्राम किया, जिसमें हजारों लोग जुड़े। उन्होंने लोगों के स्वास्थ्य की कामना करते हुए बहुत ही सुन्दर भजन गाए और सबके लिए मंगल कामना की।
यही नहीं उन्होंने लोगों को वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब के अच्छे नि:स्वार्थ काम को देखते हुए लोगों को उससे जुडऩे का आह्वान भी किया। मुझे पूरी उम्मीद है जब सबके दिलों से जुड़ा, दिलों में बसने वाला युवा भजन गायक लोगों से अपील करेंगे तो बहुत से लोग आएंगे क्योंकि सभी लोग जिन्दगी में अच्छा काम करना चाहते हैं, परन्तु उन्हें उचित स्थान चाहिए होता है।
मुझे आज से 15 साल पहले का समय याद आ गया जब वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब शुरू ही किया था। अभी बहुत से लोगों को मालूम ही नहीं था तब नरेन्द्र चंचल जी ने स्वयं आकर अपनी सेवा दी थी। बहुत बड़ा प्रोग्राम किया और साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए राशि भी देकर गए थे कि उन्होंने कहा था मेरी पत्नी नम्रता ने कहा कि इतने अच्छे काम के लिए जा रहे हो खाली हाथ मत जाना। बहुत ही अच्छा लगा था और हौंसला भी बढ़ा था क्योंकि वो दूसरा, तीसरा प्रोग्राम था। मुझे तकरीबन बहुत से लोग कहते थे किरण  क्या कर रही है। घर में एक बुड्डा नहीं सम्भाला जाता तो क्या करेगी इतने बुड्डों का काम करके। बच्चों का, लड़कियों का काम कर खुशियां मिलेंगी। तब ऐसे लोगों का साथ आकर खड़े होना, सहयोग देना मेरे लिए आगे बढऩे की प्रेरणा थी।
यही आज फिर से सिद्धार्थ मोहन ने किया। सबका मंगल होये रे गाते हुए सभी देशवासियों और बुजुर्गों के लिए मंगल की कामना की और वरिष्ठ नागरिकों के लिए गुप्त राशि भी सहायता के लिए दी।
 अश्विनी जी के जाने के बाद मैं अन्दर से बहुत टूट चुकी हूं, परन्तु बुजुर्गों के आशीर्वाद और लड़कियों के लिए जो काम करती हूं, वो मुझे उठने के लिए प्रेरित करते हैं। मैं ही अक्सर कहती थी ‘शो मस्ट गो ऑन’। चाहे कुछ भी हो जाए अब मुझे करके दिखाना है। सिद्धार्थ मोहन के भजन अश्विनी जी को बहुत पसंद थे। वह अमेरिका में हर समय इन्हीं के भजन यूट्यूब पर सुनते थे और तकलीफ में भी उन्हें उन्हीं के भजन सुनकर नींद आती थी और उन्होंने कहा था कि किरण जैसे ही इंडिया वापस जाएंगे, इसके बैठकर भजन सुनेंगे, इनसे मिलेंगे। यह लडक़ा मुझे बहुत अच्छा लगता है। इसकी आवाज बहुत अच्छी लगती है। यह बहुत आगे जाएगा और आते ही हमारी शादी की सालगिरह  थी। अपने ड्रॉइंग रूम में ही हमने छोटी सी भजन संध्या रखी। उसमें गिनी-चुनी हस्तियां सिद्धार्थ मोहन पर मोहित हो गईं। क्या आवाज थी, क्या सुर और ताल थे और जब कोई दिल से, साफ मन से प्रभु को याद करता है तो उसके चेहरे पर स्पेशल प्रभु की कृपा से नूर आता है। तब बहुत ही आनंद आया था 2 घंटे भजन किया परन्तु हमारा मन नहीं भरा था। अश्विनी जी ने कहा सिद्धार्थ मोहन को फिर निमंत्रण देंगे और सिर्फ  हम दोनों बैठकर सुनेंगे, परन्तु वो दिन नहीं आया। अश्विनी जी चले गए उनकी अंतिम रस्म मेें मैंने सिद्धार्थ मोहन को ही याद किया परन्तु वो भी इतना अश्विनी जी से जुड़ चुका था, इतना स्नेह हो गया था कि उस दिन उसकी आवाज उसका साथ ही नहीं दे रही थी। यानी सिद्धार्थ मोहन इतना इमोशनल थे कि उनसे गाया ही नहीं जा रहा था।
सबका मंगल होये रे गाते हुए सिद्धार्थ मोहन ने अपने प्रिय अश्विनी जी को याद किया, श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुझे अश्विनी जी से जुड़ी हर चीज, हर व्यक्ति, हर ऑफिस का कर्मचारी, उनके मित्र, उनके डाक्टर सबसे प्यार है, उनका मेरे दिल में सम्मान है। यानी दिल से जुड़ी हूं। सिद्धार्थ मोहन में बिल्कुल मुझे अपने छोटे भाई का रूप नजर आता है। जब उसे देखती हूं, सुनती हूं तो अश्विनी जी से उसका लगाव महसूस करती हूं।
मुझे बहुत से फोन आए जिन्होंने इस तनाव भरे समय में सिद्धार्थ मोहन के प्रोग्राम को बहुत लाइक किया। उनका तनाव भी कम हुआ और शिवरात्रि में सबने शिव भगवान का भी सिमरण किया। वाक्य सबका मंगल होये रे...हम कहते हैं सबको सुख, शांति, समृद्धि मिले। 
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