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बंटवारे के समय बरती जाती सावधानियां तो करतापुर साहिब पाकिस्तान में नहीं भारत में होता: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि बंटवारे के समय कुछ सावधानियां बरते गये होते तो करतापुर साहिब पाकिस्तान में नहीं भारत में होता।
बंटवारे के समय बरती जाती सावधानियां तो करतापुर साहिब पाकिस्तान में नहीं भारत में होता: राजनाथ सिंह
केंद्र की मोदी सरकार अकसर देश के बंटवारे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर बनी रहती है। इसी कड़ी में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि बंटवारे के समय कुछ सावधानियां बरते गये होते तो करतापुर साहिब पाकिस्तान में नहीं भारत में होता। सिख समुदाय ने आजादी की लड़ाई में बड़ा संघर्ष किया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब हमें आजादी मिली तब हमें बंटवारे का दंश झेलना पड़ा, सिख समुदाय को काफी कुछ बर्दाश्त करना पड़ा। राजनाथ सिंह ने कहा, 'अपने युवाओं को सिखों का इतिहास पढ़ाएं। यह देश सिख समुदाय का योगदान कभी नहीं भूलेगा। कुछ लोग खालिस्तान की मांग करते हैं। आप खालिस्तान की बात क्यों करते हैं...सारा हिन्दुस्तान आपका है।' रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने पूर्व में कई मुश्किलों का सामना किया है।
सिख समुदाय की वजह से ही आज भारतीय संस्कृति बची हुई है। सिख समुदाय का इतिहास स्वर्णिम रहा है लेकिन परेशानी यह है कि इनमें से कई लोग इतिहास को नहीं जानते हैं।  बता दें कि यह गुरुद्वारा पाकिस्तान के नारवाल जिले में है और यह भारत की सीमा से सिर्फ तीन किलोमीटर की दूरी पर ही है। लाहौर से इसकी दूरी तकरीबन 120 किलोमीटर की है।
पहले भारत के श्रद्धालु करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का दर्शन दूरबीन से करते थे, जिसे भारत और पाकिस्तान की सरकार ने मिलकर कॉरिडोर बनवा दिया था। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिखों का एक धार्मिक स्थल है, जोकि पाकिस्तान में स्थित है। इसी गुरुद्वारे को गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के आखिरी साल बिताए थे। यहां पर उन्होंने तकरीबन 16 साल तक जीवन व्यतीत किया था। उनके शरीर को त्यागने के बाद इस गुरुद्वारे को बनवाया गया था।





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