सिख कौम न होती तो भारत की संस्कृति सुरक्षित न होती : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली : भारत की संस्कृति का रक्षा के लिए सिखों का योगदान और बलिदान सबसे ज्यादा है। सिख समाज हमारा बड़ा भाई है और आज मुझे यह कहते हुए संकोच नहीं है कि अगर सिख समाज न होता तो भारत की संस्कृति सुरक्षित न होता। आजादी हासिल करने के बाद भी देश की सुरक्षा के मामले में जनसंख्या के अनुपात सबसे ज्यादा योगदान सिखों का रहा है। यह कहना है देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का। 

दरअसल रविवार को आईजी इंडोर स्टेडियम में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) द्वारा आयोजित गुरु नानक के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित 'रूहानी प्रकाश समागम' कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। कार्यक्रम में गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूलों के 1100 छात्रों ने एक सुर में कीर्तन पेश किया। 

कार्यक्रम के दौरान भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, शिरोमणी अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर, विक्रमजीत सिंह साहनी, मनजिंदर सिंह सिरसा, हरमीत सिंह कालका, बीबी रणजीत कौर, कुलवंत सिंह बाठ आदि उपस्थित रहे। मनजिंदर सिंह सिरसा ने समागम में पहुंचे अतिथिगणों का धन्यवाद किया। 

समागम ने रचा इतिहास... आईजी इंडोर स्टेडियम में रविवार को एक साथ 1100 छात्रों द्वारा एक सुर में सामूहिक कीर्तन कर एक नया इतिहास रच दिया। इस दौरान मौजूद 25 हजार से ज्यादा दर्शकों उपस्थिति रहे। गुरबाणी के जाप ने दर्शकों को इल्लाही नूर के प्रत्यक्ष दर्शन करवा दिए। कार्यक्रम से पहले गुरु नानक की रचना ‘आरती' द्वारा अकाल पुरख को की गई उस्तति को बहुत ही सुंदर ढंग से गाया गा। इसके बाद ‘मिटिया अंधेरा चन चड़ेया‘ का सुरीला गायन किया।

मनमोहन सिंह ने दी बधाई... समागम के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह को सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में गुरु नानक के 550वें प्रकाश पर्व पर सिख जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक न सिर्फ हिन्दुस्तान बल्कि सारी दुनिया को एकत्र करने की खातिर दुनियाभर के देशों का सफर तय किया। उन्होंने कभी हिन्दू और मुस्लिम में फर्क नहीं रखा। उनकी इसी विचार को अपनाने की अपील लोगों से की। वहीं सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम गुरु नानक का संदेश घर-घर तक पहुंचाएं। गुरु साहिब का संदेश है कि किरत करो, नाम जपो, वंड छको अगर कोई भी इंसान मान लेगा तो वह जिंदगी में कामयाब ही होगा, कभी निराश नहीं होगा।
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