10 अक्टूबर तक जांच सीबीआई को न सौंपी तो जाएंगे अदालत - AAP

आप विधायक कुलवंत सिंह पंडोरी, कोर समिति मैंबर सुखविन्दर सुखी, मनजीत सिंह सिद्धू, नरिंदर सिंह शेरगिल, हलका बाबा बकाला के प्रधान दलबीर सिंह टोंग, लीगल विंग संगरूर के प्रधान तपिन्दर सिंह सोही की मौजूदगी में हरपाल सिंह चीमा ने राहुल भंडारी वाली समिति की क्लोजर रिपोर्ट मीडिया को जारी की। 

चीमा ने दावा किया कि क्लोजर रिपोर्ट काफी हड़बड़ाहट में ठीक 10 सितम्बर को पेश की गई, जिस दिन हम (आम आदमी पार्टी) ने मीडिया के समक्ष इस सनसनीखेज घोटाले का विजीलैंस जांच रिपोर्ट जारी कर पर्दाफाश किया था।लुधियाना, सुनीलराय कामरेड : पंजाब उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय अधीन आते पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (पीएसआईईसी) में हुए करीब 1500 करोड़ रुपए के इंडस्ट्रियल प्लाट अलाटमैंट घटाले के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के सीनियर व विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब के उद्योग मंत्री शाम सुंदर अरोड़ा का इस्तीफा मांगा है। 

इसके साथ ही घोटाले में सीधे तौर पर शामिल पीएसआईईसी के आधिकारियों कर्मचारियों की बर्खास्तगी और विजीलैंस जांच रिपोर्ट में आरोपी पाए गए उच्च आधिकारियों को कालीन चिट्ट देने वाली राहुल भंडारी के नेतृत्व वाली आईएएस अफसरों की तीन सदस्यता समिति की भूमिका भी सीबीआई जांच के घेरे में लाने की मांग हरपाल सिंह चीमा और आप लीडरशिप ने उठाई, साथ ही सरकार को चेतावनी दी कि यदि 10 अक्तूबर तक जांच सीबीआई को न सौंपी तो आप अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। 

हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि विजीलैंस जांच रिपोर्ट को नकारा करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के एक बेहद करीबी की भूमिका भी संदिग्ध है। चीमा के मुताबिक यदि सीबीआई इस अरबों रुपए के घोटले की बारीकी के साथ जांच करती है तो इसकी आंच कई आईएएस अफसरों समेत मुख्यमंत्री के सलाहकारों तक पहुंचेगी। 

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विजीलैंस जांच रिपोर्ट में पीएसआईईसी के चीफ जनरल मैनेजर एसपी सिंह, जनरल मैनेजर (योजना) जसविन्दर सिंह रंधावा, अस्टेट अफसर अमरजीत सिंह काहलों, सीनियर असिस्टेंट विजय गुप्ता, सलाहकार दर्शन गर्ग और एसडीओ सवतेज सिंह समेत इनके एक दर्जन से अधिक पारिवारिक सदस्यों को आरोपी पाया गया था और 30 जनवरी 2019 को विजीलैंस ब्यूरो के संयुक्त डायरैक्टर ने इन आधिकारियों के विरुद्ध धारा 409, 420, 465, 467, 471, 120 -बी आइपीसी और भ्रष्टाचार विरोधी कानून के अंतर्गत कई अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांगी थी, परंतु सरकार ने मुकदमा दर्ज करने की इजाजत देने की बजाए राहुल भंडारी के नेतृत्व वाली तीन सदस्यता समिति को विजीलैंस की जांच रिपोर्ट की जांच सौंप दी।

इस समिति ने पूरे घोटाले के मुख्य सूत्रधार एसपी सिंह समेत कई अफसरों को कालीन चिट्ट देकर सिर्फ जसविन्दर सिंह रंधावा और सवतेज सिंह को ही चार्जशीट किया गया है। चीमा ने आरोप लगाया कि राहुल भंडारी वाली समिति की रिपोर्ट ने पूरे घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की है और अपनी 'क्लोजर रिपोर्ट' में रंधावा और सवतेज सिंह के विरुद्ध चार्जशीट भी आंखों में धूल झोंकने से ज्यादा कुछ नहीं थी। आज भी इन अफसरों का अपनी-अपनी  सीटों पर डटे रहना इस बड़ी मिलीभुगत की प्रत्यक्ष मिसाल है। जबकि इनको तुरंत सस्पैंड करना चाहिए था। 

चीमा ने कहा कि तीन सदस्यता आईएएस समिति ने एसपी सिंह समेत बाकी अफसरों को किस आधार पर कालीन चिट्ट दी? जांच दौरान भी यह अफसर उन ही पदों/सीटों पर कैसे बने रहे और 10 सितम्बर को दी क्लोजर रिपोर्ट के उपरांत भी जे.एस. रंधावा और सवतेज सिंह को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? उद्योग मंत्री शाम सुंदर अरोड़ा इस का स्पष्टीकरण दें।

हरपाल सिंह चीमा ने माननीय हाईकोर्ट के मौजूदा जज की निगरानी में इस 1500 करोड़ रुपए के घोटाले की सीबीआई को समयबद्ध जांच की मांग दोहराते हुए सभी आरोपी अफसरों और इनके रिश्तेदारों /पारिवारिक सदस्यों की संपत्ति अटेच की जाए।

चीमा ने कहा कि घोटाले के सूत्रधार चीफ जनरल मैनेजर एसपी सिंह को ही जब अपने विरुद्ध शुरू हुई विजीलैंस जांच का नोडल अधिकारी बना दिया गया तो एसपी सिंह ने अनगिणत फर्जी प्लाट विजीलैंस जांच में शामिल ही नहीं किए। कई बिल्कुल सही प्लांटों को जांच में शामिल कर दिया जिससे जांच को भटकाया जा सके। इन प्लाटों में सिर्फ मोहाली के ही डी -203, डी -204, डी -209, एफ -550, डी -224, डी -225, डी -226, डी -227, एफ -307, एफ -308, एफ -459, एफ -460, एफ -462, एफ -464, एफ -465, एफ -466, एफ -467, ई -260 -ए, ई -260, ई -261, डी -230, सी -193, सी -194, सी -195, डी -249, ई -237 -ए, सी -196, सी -209, सी -210, सी -192, डी -263 प्लांट की जांच होने पर ओर भी बड़े भेद खुलेंगे। इनमें बहुत से विजीलैंस जांच से भी बाहर रखे गए है। जिनकी जांच अलाटमैंट के लिए विज्ञापन जारी होने से लेकर ऐरनैस्ट मनी (बयाना) के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक अकाउंट और कंपनियों की बजाए इन कंपनियों के मालिकों के नामों की जांच सीबीआई के हवाले हो।

एक ही बैंक खाते में बहुत ज़्यादा अर्नेस्ट मनी और पेमैंटस अलग-अलग नामों से हुई है। चण्डीगढ़ स्थित सैक्टर 9 स्थित आईसीआईसीआई बैंक में विनै प्रताप सिंह छीना का खाता नंबर 001301600348 इस की प्रत्यक्ष मिसाल है। छीना जनरल मैनेजर जसविन्दर सिंह रंधावा का मसेरा भाई है।

चीमा ने मांग की है कि पूरे घोटाले के मुख्य सूत्रधार एसपी सिंह समेत विजीलैंस ब्यूरो की ओर से आरोपी पाए गए सभी अधिकारी की पीएसआईईसी के मुख्य दफ्तर में तुरंत 'एंट्री बैन' की जाए और सीबीआई जांच पूरी होने तक इनको जबरन छुट्टी दे कर घर बिठाया जाए, क्योंकि आज भी यह अधिकारी अपनी फर्जी अलाटमैंटों को आगे बेचने के लिए (ट्रांसफर) न केवल ओर ग्राहकों को अपने जाल में फंसा रहे हैं, बल्कि अपने घोटालों पर पर्दा डालने के लिए रिकार्ड के साथ भी छेड़छाड़ कर रहे हैं।
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