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इशारों-इशारों में अखिलेश ने दिए मायावती से फिर दोस्ती के संकेत, सपा और बसपा का हो सकता है गठबंधन?

लोकसभा चुनाव होने में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन इसकी सुगबुगाहट उत्तर प्रदेश में होने लगी है। विपक्षी पार्टियां भाजपा को हराने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।
इशारों-इशारों में अखिलेश ने दिए मायावती से फिर दोस्ती के संकेत, सपा और बसपा का हो सकता है गठबंधन?
लोकसभा चुनाव होने में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन इसकी सुगबुगाहट उत्तर प्रदेश में होने लगी है। विपक्षी पार्टियां भाजपा को हराने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। खासतौर, अखिलेश यादव जो आज तीसरी बार पार्टी के अध्यक्ष बन गए है। उन्होंने ने भी इशारों इशारों में साफ कर दिया की वो बीजेपी को हराने के लिए किसी से भी हाथ मिला सकते है। 
विष्य में दोनों पार्टियां हाथ मिला सकती 
दरअसल, यूपी में  सपा का अधिवेशन कार्यक्रम चल रहा है, जहां अखिलेश यदाव जनता को संबोधित कर रहे थे। यहां उन्होंने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है, लेकिन बसपा पर उन्होंने कोई निजी हमला नहीं किया है , जिसका मतलब साफ है कि भविष्य में दोनों पार्टियां हाथ मिला सकती है। बता दें, अभी कुछ दिन पहले विधानसभा सत्र के दौरान अखिलेश ने पैदल यात्रा निकाली थी, जिसका समर्थन बसपा सुप्रीमों मायावती ने किया था।
दोनों पक्षों के बीच विवाद 
बता दें अखिलेश यादव ने इससे पहले बुधवार को भी बीएसपी या फिर मायावती पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि 2019 में, सपा ने बसपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और  जो त्याग करना था, वह भी किया।। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वह बसपा को साथ लेकर एक बार फिर त्याग और सहयोग का जज्बा दिखाएंगे? आपको बता दें कि 2019 के आम चुनाव में सपा और बसपा ने गठबंधन किया था। दोनों ने 15 सीटें जीती थीं, लेकिन अकेले बसपा के खाते में 10 सीटें थीं. इस पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया और अंत में एक बार फिर यह ऐतिहासिक गठबंधन टूट गया था ।
बसपा का सबसे खराब प्रदर्शन किया
2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो सपा ने 37 फीसदी का ऐतिहासिक वोट हासिल किया, लेकिन तब भी सत्ता से दूर रह गई। वहीं बसपा को महज एक सीट ही मिली और उसने अपने इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन किया। इसके बाद भी उसे 12 फीसदी वोट मिले थे। ऐसे में यदि सपा और बसपा के वोटों को मिला लिया जाए तो यह 49 फीसदी हो जाता है। शायद अखिलेश इसी वजह से मायावती और बीएसपी के प्रति उदार हैं ताकि 12 फीसदी का भी साथ मिल जाए तो वह 2024 में अच्छा परिणाम दे सकते हैं। 

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