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मन की बात : PM मोदी बोले-देश का कृषि क्षेत्र, हमारे किसान, गांव आत्मनिर्भर भारत का आधार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कोरोना के इस कठिन समय में हमारा कृषि क्षेत्र, हमारा किसान इसका जीवंत उदाहरण है। संकट के इस काल में भी हमारे देश के कृषि क्षेत्र ने फिर अपना दमखम दिखाया है।
मन की बात : PM मोदी बोले-देश का कृषि क्षेत्र, हमारे किसान, गांव आत्मनिर्भर भारत का आधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश के किसानों की तारीफ करते हुए स्टोरी टेलिंग पर चर्चा की। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान लोगों से कहानियां भी सुनीं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में किस्सा-गोई की समृद्ध परंपरा रही है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘हमारे यहां कहा जाता है कि जो जमीन से जितना जुड़ा होता है, वह बड़े से बड़े तूफानों में भी उतना ही अधिक रहता है। कोरोना के इस कठिन समय में हमारा कृषि क्षेत्र, हमारा किसान इसका जीवंत उदाहरण है। संकट के इस काल में भी हमारे देश के कृषि क्षेत्र ने फिर अपना दमखम दिखाया है।’’ 
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश का कृषि क्षेत्र, हमारे किसान, हमारे गांव आत्मनिर्भर भारत का आधार हैं। ये मजबूत होंगे तो आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत होगी।’’ मोदी ने हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ सफल किसानों तथा किसान समूहों का जिक्र करते हुए कहा कि बीते कुछ समय में कृषि क्षेत्र ने खुद को अनेक बंदिशों से आजाद किया है और अनेक मिथकों को तोड़ने का प्रयास किया है। 
हरियाणा के सोनीपत जिले के किसान कंवर चौहान की कहानी बताते हुए मोदी ने कहा कि एक समय था जब उन्हें मंडी से बाहर अपने फल और सब्जियां बेचने में बहुत दिक्कत आती थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में फल और सब्जियों को जब एपीएमसी कानून से बाहर कर दिया गया, तो इसका उन्हें और अन्य किसानों को फायदा हुआ। 
मोदी ने कहा, ‘‘आज वह स्वीट कॉर्न और बेबी कार्न की खेती कर रहे हैं। इससे उनकी सालाना कमाई ढाई से तीन लाख रुपये प्रति एकड़ है।’’ प्रधानमंत्री ने कुछ अन्य किसानों की कहानी सुनाते हुए कहा कि इन किसानों के पास अपने फल व सब्जियों को कहीं पर भी, किसी को भी बेचने की ताकत है और यह ताकत ही उनकी इस प्रगति का आधार है। 
उन्होंने कहा, ‘‘अब यही ताकत देश के दूसरे किसानों को भी मिली है। फल व सब्जियों के लिए ही नहीं, अपने खेत में वह जो पैदा कर रहे हैं, वह चाहे धान, गेहूं, सरसों, गन्ना जो उगा रहे हैं, उसको अपनी इच्छा के अनुसार जहां ज्यादा दाम मिलें, वहीं पर बेचने की अब उनको आजादी मिल गई है।’’
भारत में किस्सा-गोई की समृद्ध परंपरा रही
कहानी कहने की कला यानी स्टोरी टेलिंग पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में किस्सा-गोई की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस कालखंड में पूरी दुनिया अनेक परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। आज, जब दो गज की दूरी एक अनिवार्य जरूरत बन गई है, तो इसी संकट काल ने, परिवारों के सदस्यों को आपस में जोड़ने और करीब लाने का काम भी किया है। 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमें, जरूर एहसास हुआ होगा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधायें बनाई थी, वो आज भी कितनी महत्वपूर्ण हैं और जब नहीं होती हैं तो कितनी कमी महसूस होती है। ऐसी ही एक विधा जैसे मैने कहा, कहानी सुनाने की कला यानि स्टोरी टेलिंग। 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जो हमारी परंपराएं थीं, जो परिवार में एक प्रकार से संस्कार सरिता के रूप में चलती थी, उसकी कमी महसूस हो रही है, ऐसा लग रहा है कि बहुत से परिवार हैं जहां से ये सब खत्म हो चुका है, और इसके कारण, उस कमी के रहते हुए, इस संकट के काल को बिताना परिवारों के लिए थोड़ा मुश्किल हो गया, और, उसमें एक महत्वपूर्ण बात क्या थी? हर परिवार में कोई-न-कोई बुजुर्ग, बड़े व्यक्ति परिवार के, कहानियां सुनाया करते थे और घर में नई प्रेरणा, नई ऊर्जा भर देते हैं। 
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