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भारत के पहले सांस्कृतिक राजनयिक अमेरिका में 3 साल का कार्यकाल पूरा कर स्वदेश लौटें

अमेरिका में भारत द्वारा नियुक्त किये गए पहले सांस्कृतिक राजनयिक मोक्षराज अपना 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद स्वदेश के लिए रवाना हो गए।
भारत के पहले सांस्कृतिक राजनयिक अमेरिका में 3 साल का कार्यकाल पूरा कर स्वदेश लौटें
अमेरिका में भारत द्वारा नियुक्त किये गए पहले सांस्कृतिक राजनयिक मोक्षराज अपना 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद  स्वदेश के लिए रवाना हो गए। अपने 3 साल के कार्यकाल में मोक्षराज ने अमेरिका संस्कृत एवं हिंदी भाषा की शिक्षा दी और अमेरिका के कई राज्यों में योग व ध्यान के जरिये भारत की पारंपरिक संस्कृति का प्रचार किया जिसका वैदिक मूल मंत्र है ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ एवं कोविड-19 के बाद की दुनिया में इसका अपना महत्व है।
वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में भारतीय संस्कृति के शिक्षक के रूप में 3 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद मोक्षराज ने कहा, ‘‘भारत एक मात्र देश है जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत में विश्वास करता है और भारत का यह विचार नया नहीं है बल्कि इंसान की उत्पत्ति से ही है, इसलिए इसे यजुर्वेद में ‘यात्रा विश्व भवतेकनिदम’ की प्रेरणा देता है।’’
अमेरिका से रवाना हुए मोक्षराज ने कहा, ‘‘यहां तक कि सभ्य व्यक्ति भी अपने परिवार या कुटुम्ब को खोना नहीं चाहता, उसी प्रकार से भारतीय संस्कृति भी सभी के कल्याण के लिए कार्य कर रही। इसलिए भारत योग, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य, शाकाहार और अहिंसा के जरिये प्राकृतिक संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।’’
उल्लेखनीय है कि मोक्षराज उन 162 शिक्षकों में से हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत सरकार की पहल पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा दुनिया भर के भारतीय मिशन में 3 साल पहले भारतीय परंपरा एवं संस्कृति का प्रसार करने के लिए भेजा गया था। उन्होंने कहा, ‘‘यह पहली बार था जब सरकार ने 162 भारतीय संस्कृति शिक्षकों की नियुक्ति सभी महाद्वीपों में करने की योजना बनाई। 
गौरतलब है मोक्षराज का जन्म 1979 में राजस्थान में हुआ था और अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने अमेरिकी कैपिटॉल (संसद), व्हाइट हाउस और वाशिंगटन स्मारक के सामने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन करवाया।
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