Explainer: अभिषेक बनर्जी को लेकर TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! दिल्ली तक पहुंची बगावत, कई सांसदों ने NDA के समर्थन का किया दावा
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही अंदरूनी खींचतान अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रही है। पार्टी के भीतर शुरू हुई नाराजगी अब दिल्ली तक पहुंच गई है। पहले कोलकाता में विधायकों के एक समूह ने अलग राह अपनाई थी और अब कुछ सांसदों ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। सोमवार को टीएमसी के कई लोकसभा सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसदों ने अलग गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष पहले से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका है। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने का फैसला लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
स्पीकर को भेजा गया समर्थन पत्र

काकोली घोष दस्तीदार के अनुसार, सांसदों के समूह ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में NDA के प्रति समर्थन जताने की इच्छा व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह फैसला सभी साथियों से चर्चा के बाद लिया गया है। उन्होंने बताया कि सांसदों का यह समूह मानता है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में NDA के साथ जुड़ना उनके लिए बेहतर ऑप्शन है। उनका दावा है कि यह कदम जनता के जनादेश और बदलती राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
बताया जा रहा है कि असंतुष्ट सांसद लोकसभा में नए नेतृत्व की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में अभिषेक बनर्जी लोकसभा में टीएमसी के नेता हैं, लेकिन बागी गुट काकोली घोष दस्तीदार को यह जिम्मेदारी देने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सांसदों का यह समूह केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं चाहता, बल्कि संसदीय नेतृत्व में भी परिवर्तन की मांग कर रहा है।
Trinamool Congress MPs Revolt: कोलकाता से शुरू हुई थी बगावत

टीएमसी के भीतर असंतोष की शुरुआत विधानसभा चुनाव के बाद से मानी जा रही है। खबरों के मुताबिक, पार्टी के बागी सांसद लोकसभा में वर्तमान नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee TMC) के स्थान पर काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता बनाना चाहते हैं। दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए घटनाक्रम की तर्ज पर अब सांसद भी नई रणनीति अपनाने की तैयारी में हैं। कोलकाता में जब ममता बनर्जी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित किया था, तभी पार्टी के भीतर असंतोष उभरने लगा था। इसके बाद करीब 60 विधायकों के एक समूह ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस गुट को सदन में "वास्तविक टीएमसी" के रूप में मान्यता देते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया था।
अब इसी तरह का कदम दिल्ली में भी देखने को मिल रहा है। काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं। उन्होंने कहा (TMC Delhi Meeting) कि यह निर्णय अन्य सांसदों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। काकोली के मुताबिक, पार्टी में बढ़ते असंतोष और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सांसदों ने अपनी राजनीतिक दिशा पर गंभीरता से विचार किया है। उन्होंने कहा कि समूह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जुड़ने का फैसला किया है और उनका मानना है कि यही जनता के जनादेश के अनुरूप कदम होगा।
हमने जनता के फैसले का सम्मान किया
उन्होंने कहा, "हमने जनता के फैसले का सम्मान किया है और हमें लगता है कि आगे की राजनीतिक यात्रा एनडीए के साथ मिलकर तय की जानी चाहिए।" काकोली घोष दस्तीदार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पद से हटाने का फैसला एकतरफा और मनमाने ढंग से लिया गया। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व की घोषणा मात्र से संसदीय और संवैधानिक स्थिति तत्काल नहीं बदल जाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसदों का यह समूह जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष को अपने निर्णय से अवगत कराएगा और औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा बनने की इच्छा जताएगा।
TMC rebel MPs Delhi Meeting: काकोली घोष की पार्टी में भूमिका
काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी की वरिष्ठ नेताओं में गिनी जाती हैं। वे बारासात लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं और लंबे समय से पार्टी का महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं। हालांकि विधानसभा 2026 चुनाव में हार के बाद उन्होंने अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से उन्होंने कई मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व के प्रति असहमति भी जताई है। हाल के महीनों में वे पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं की प्रमुख आवाज बनकर उभरी हैं। टीएमसी सांसद डॉ. शर्मिला सरकार ने भी पार्टी के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ करीब 20 सांसद जुड़े हुए हैं और यह संख्या आगे बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और गुटबाजी से वे काफी परेशान थीं। उनका कहना है कि पुराने और अनुभवी नेताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था, जिससे कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष बढ़ता गया। शर्मिला सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जिन नेताओं ने ठीक से काम नहीं किया, उनके बारे में पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट रिपोर्ट की जानकारी उन्हीं लोगों तक पहुंच गई जिनके खिलाफ शिकायत की गई थी।
West Bengal: पार्टी में टूट को लेकर अलग-अलग दावे
जहां बागी गुट लगभग 20 सांसदों के समर्थन का दावा कर रहा है, वहीं पार्टी के दूसरे नेता इस आंकड़े को सही नहीं मानते। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी में किसी बड़ी टूट से इनकार किया है। उनका कहना है कि बागी सांसदों की संख्या बहुत कम है और पार्टी अभी भी एकजुट है। उन्होंने दावा किया कि स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और अधिकांश सांसद अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं। टीएमसी के भीतर चल रहा यह विवाद आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है। यदि सांसदों का बड़ा समूह वास्तव में अलग रुख अपनाता है, तो इसका असर संसद से लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति तक दिखाई दे सकता है।
फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल सांसदों की नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के अंदर नेतृत्व और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर चल रहे लंबे असंतोष का परिणाम भी हो सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या बागी सांसद अपने रुख पर कायम रहते हैं या फिर कोई समझौते का रास्ता निकलता है।
यह भी पढ़ें: ‘आंकड़े हमेशा जीत की गारंटी नहीं’, राज्यसभा चुनाव पर महुआ माजी की चेतावनी

Join Channel