बद्रीनाथ दान घोटाले पर सियासी घमासान: कांग्रेस नेताओं ने कहा- न्यायिक जांच कराई जाए
देहरादून, 8 जुलाई (आईएएनएस)। बद्रीनाथ मंदिर में दान से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गर्म है। बद्रीनाथ विधानसभा से विधायक लखपत बुटोला, कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल और धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार पर मामले की निष्पक्ष जांच कराने में विफल रहने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में केवल औपचारिक जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की निगरानी में पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
देहरादून में आईएएनएस से बातचीत के दौरान बद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि आरोप सामने आने के बाद उन्होंने स्वयं स्थानीय कर्मचारियों, अधिकारियों और विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उन्हें बेहद दुख हुआ कि जिस धाम में वह देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को मोक्ष और पितरों के तर्पण के लिए आने का निमंत्रण देते रहे, उसी धाम को कथित तौर पर सरकार और उससे जुड़े लोगों द्वारा गिरोह बनाकर लूटने का आरोप सामने आ रहा है। किसी छोटे कर्मचारी को दोषी ठहराकर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि या तो हाई कोर्ट के तीन कार्यरत न्यायाधीशों की निगरानी में जांच समिति गठित की जाए या फिर विधानसभा के सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की सर्वदलीय समिति बनाकर पूरे मामले की जांच कराई जाए। साथ ही, 23 अप्रैल से अब तक के सभी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं और पिछले कई वर्षों से मंदिर में यदि किसी तरह की अनियमितता का नेटवर्क चल रहा है तो उसकी भी व्यापक जांच हो।
लखपत बुटोला ने आगे कहा कि इससे पहले भी वीआईपी दर्शन, क्यूआर कोड व्यवस्था और केदारनाथ मंदिर के स्वर्ण प्रकरण जैसे मामलों को लेकर विवाद सामने आए थे। मंदिरों में मौजूद बहुमूल्य धातुओं और श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे का अब तक कोई पारदर्शी ऑडिट सार्वजनिक नहीं किया गया है। श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि भगवान के नाम पर प्राप्त होने वाले दान का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। सरकार के शीर्ष स्तर तक इस पूरे मामले में संरक्षण दिया जा रहा है, इसलिए उन्हें वर्तमान सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की कोई उम्मीद नहीं है।
कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप ने सरकार और मंदिर समितियों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तो खुली लूट मची हुई है। भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग, चाहे अयोध्या में हों, बद्रीनाथ में हों या केदारनाथ में, उन्होंने बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। जिस व्यक्ति पर सवाल उठ रहे हों, उसके रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। 'दूध की रखवाली बिल्ली नहीं कर सकती', इसलिए पहले जिम्मेदार लोगों को हटाया जाए और उसके बाद ऐसे न्यायाधीशों की निगरानी में जांच कराई जाए जिनकी निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठ सके।
धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि कांग्रेस पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। मंदिरों में भी विरोध दर्ज कराया जा रहा है और पार्टी की मांग है कि भाजपा सरकार इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करे तथा सर्वोच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीशों की देखरेख में स्वतंत्र जांच कराए।
कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने सरकार की जांच प्रक्रिया को लीपापोती करार दिया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मामले में केवल सरकारी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सर्वदलीय जांच समिति बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता विपक्ष का कोई वरिष्ठ नेता करे। जांच कमेटी के सभी सदस्य भगवान बद्रीनाथ की शपथ लेकर यह संकल्प लें कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच करेंगे, तभी जनता उस जांच पर विश्वास करेगी। गोदियाल ने वर्तमान जांच की तुलना अंकिता भंडारी हत्याकांड की एसआईटी जांच से करते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह उस मामले में सबूतों को सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें समाप्त करने के आरोप लगे थे, उसी प्रकार इस मामले में भी वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय उन्हें दबाने की आशंका है।
सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर सवाल उठाते हुए गोदियाल ने कहा कि राज्य में जीरो टॉलरेंस केवल नारा बनकर रह गया है। सरकार का लगभग हर विभाग भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के स्पष्ट मामलों में भी कठोर कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं हैं। जब सत्ता में बैठे लोगों के हाथ स्वयं रंगे हों तो वे दूसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पाते।
--आईएएनएस
पीएसके
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