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क्या है चांदीपुरा वायरस? बच्चों के लिए कितना खतरनाक, अब तक गुजरात में 22 मासूमों ने तोड़ा दम

Chandipura Virus Kya Hai: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है और कई का इलाज जारी है। यह वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। समय पर इलाज, सैंडफ्लाई से बचाव और लक्षण दिखते ही अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
01:47 PM Aug 04, 2026 IST | Amit Kumar
Chandipura Virus Kya Hai: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है और कई का इलाज जारी है। यह वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। समय पर इलाज, सैंडफ्लाई से बचाव और लक्षण दिखते ही अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
क्या है चांदीपुरा वायरस  बच्चों के लिए कितना खतरनाक  अब तक गुजरात में 22 मासूमों ने तोड़ा दम
Chandipura Virus Kya Hai ( credit AI genrated )

Chandipura Virus Kya Hai: मानसून का मौसम अपने साथ कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा लेकर आता है। इन्हीं में एक नाम है चांदीपुरा वायरस (CHPV), जिसने इन दिनों गुजरात में स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में इस वायरस की वजह से कई बच्चों की जान चली गई है और कई अन्य बच्चों का इलाज अस्पतालों में जारी है।  सबसे बड़ी बात यह है कि यह संक्रमण मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर असर डालता है और  कई मामलों में बेहद कम समय में गंभीर रूप ले सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों या दो-तीन दिनों के भीतर मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए समय पर पहचान और तुरंत अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी माना जा रहा है।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  गुजरात सरकार ने बताया कि राज्य में अब तक 184 बच्चों में चांदीपुरा वायरस शक  जताया गया है। इनमें 35 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ सैंपलों  की जांच अभी जारी है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक 22 बच्चों की इस वायरस की वजह से जान चली गई है। वहीं 7 बच्चों का इलाज अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में एक्सपर्ट  डॉक्टरों की देख-रेख में जारी है। सरकार का कहना है कि सभी मरीजों को बेस्ट मेडिकल  सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और उनकी लगातार देख-रेख जारी है।

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किन अस्पतालों में चल रहा इलाज?

बता दें कि राज्य के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में संक्रमित बच्चों का इलाज जारी है।  इनमें गांधीनगर, हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सिविल अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में बाल रोग एक्सपर्ट और अन्य डॉक्टर मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर किसी बच्चे में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे बिना देरी ICU में भर्ती किया जाए।

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अस्पतालों से कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। एक्सपर्ट  का मानना है कि शुरुआती इलाज मिलने पर गंभीर खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस है। यह रैब्डोविरिडे (Rhabdoviridae) परिवार का सदस्य है। इसी परिवार में रेबीज वायरस भी शामिल है, हालांकि दोनों बीमारियां अलग-अलग होती हैं। भारत में इस वायरस के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। खासकर पश्चिम और मिडल  भारत के कुछ राज्यों में मानसून के दौरान इसके संक्रमण का खतरा अधिक देखा गया है।

एक्स्पर्ट्स  के अनुसार चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेतीली या बालू मक्खी) के काटने से फैलता है। यह कीट नॉर्मल  मच्छर से काफी छोटा होता है और अक्सर लोगों की नजर में नहीं आता। सैंडफ्लाई अधिकतर उन स्थानों पर पाई जाती है जहां नमी अधिक हो, आसपास पशु रहते हों, सफाई ठीक न हो या झाड़ियां और घनी वनस्पति मौजूद हो। मानसून में इन कीड़ों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।

बच्चों को ही ज्यादा खतरा क्यों?

डॉक्टरों के अनुसार, छोटे बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसके अलावा उनका मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र भी विकास की अवस्था में होता है। इसी वजह से यह वायरस बच्चों के दिमाग पर तेजी से असर डाल सकता है। यही वजह  है कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों में इस बीमारी का खतरा सबसे अधिक माना जाता है।

इस वायरस के शुरुआती लक्षण नॉर्मल  वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इसलिए कई बार माता-पिता इसे साधारण संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आमतौर पर शुरुआत तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और उल्टी से होती है। लेकिन अगर  समय पर इलाज नहीं मिलता तो बीमारी तेजी से दिमाग तक पहुंच सकती है।

कौन-कौन से लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?

अगर  बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए:

  • 101 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक तेज बुखार
  • बार-बार उल्टी होना
  • सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी
  • लगातार सुस्ती रहना
  • बच्चे का अचानक चुप हो जाना
  • भ्रम या उलझन महसूस करना
  • दौरे पड़ना
  • बेहोश होना
  • सांस लेने में परेशानी

डॉक्टरों का कहना है कि ये लक्षण केवल चांदीपुरा वायरस के नहीं भी हो सकते हैं, लेकिन यदि इनके साथ न्यूरोलॉजिकल बदलाव दिखाई दें तो तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए।

यह वायरस इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

दूसरे वायरल संक्रमणों के मुकाबले  में चांदीपुरा वायरस बहुत तेजी से शरीर पर असर डाल सकता है। कई मामलों में मरीज की हालत केवल 48 से 72 घंटे के अंदर  गंभीर हो जाती है। वायरस दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, वह बेहोश हो सकता है और समय पर इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। इसी कारण डॉक्टर इस बीमारी में एक-एक घंटे को भी बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं।

क्या इसका कोई इलाज या वैक्सीन है?

  • फिलहाल चांदीपुरा virus के लिए कोई स्पेशल  एंटीवायरल दवा या वैक्सीन नहीं है।
  • डॉक्टर मरीज का इलाज उसके लक्षणों के आधार पर करते हैं। इसे सपोर्टिव ट्रीटमेंट कहा जाता है।
  • इस दौरान मरीज को ICU में रखकर ऑक्सीजन, तरल पदार्थ, दिमाग की निगरानी, दौरे कंट्रोल  करने वाली दवाएं और जरूरत के अनुसार अन्य इलाज दिए जाते हैं।
  • एक्सपर्ट  का कहना है कि इस बीमारी में देरी सबसे बड़ा खतरा है।
  • अगर बच्चे को शुरुआती चरण में अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं।
  • समय पर इलाज  मिलने से दिमाग और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा कम किया जा सकता है।
  • गुजरात सरकार ने प्रभावित इलाकों में विशेष अभियान शुरू किया है।
  • स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों और पशुपालन वाले क्षेत्रों में कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं ताकि सैंडफ्लाई की संख्या कम की जा सके।
  • इसके अलावा सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • राज्य में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि नए मामलों की जल्द पहचान की जा सके।

घर पर बच्चों को कैसे सुरक्षित रखें?

  • एक्सपर्ट  के अनुसार कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इस वायरस का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
  • बच्चों को हमेशा पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं ताकि कीड़े सीधे त्वचा पर न बैठ सकें।
  • बच्चों के लिए सुरक्षित कीट भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें।
  • जरूरत होने पर कीटनाशक लगी मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • घर और आसपास की सफाई बनाए रखें।
  • कचरा जमा न होने दें।
  • जहां पशु रहते हों वहां नियमित सफाई करें।
  • घर के आसपास झाड़ियां और घास अधिक न बढ़ने दें।
  • एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि मानसून के दौरान उन इलाकों में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए जहां सैंडफ्लाई की संख्या अधिक होती है।
  • ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले या यात्रा करने वाले लोगों को बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • अगर  बच्चे को तेज बुखार के साथ उल्टी, सुस्ती या दौरे जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू इलाज करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

माता-पिता के लिए सबसे जरूरी सलाह

  • हर बुखार चांदीपुरा वायरस नहीं होता, लेकिन हर तेज बुखार को हल्के में लेना भी सही नहीं है।
  • अगर बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ रही हो, वह बार-बार उल्टी कर रहा हो, बहुत ज्यादा सुस्त हो गया हो या उसका व्यवहार अचानक बदल जाए तो बिना इंतजार किए डॉक्टर से संपर्क करें।
  • यह बीमारी तेजी से बढ़ सकती है, इसलिए शुरुआती जांच और समय पर इलाज ही बच्चे की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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