धरती के नीचे क्या है हाइपोसेंटर और टेक्टोनिक प्लेट्स का खेल? वेनेजुएला आपदा के बीच समझिए भूकंप का पूरा विज्ञान
Earthquakes Kyon Aata Hai : वेनेजुएला में आए दो लगातार शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 150 से अधिक लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। जमीनी सूत्रों के मुताबिक घायलों की संख्या 700 को पार कर गई है और मलबे के नीचे से नुकसान की जो तस्वीरें आ रही हैं, उन्हें देखते हुए राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल का एलान कर दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, हताहतों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी इस त्रासदी के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें ढहती इमारतें और सड़कों पर मची अफरा-तफरी साफ देखी जा सकती है। इस बड़ी आपदा के बीच एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि आखिर धरती के भीतर ऐसा क्या होता है कि सब कुछ पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो जाता है।
Causes of Earthquake : जापान में भी भूकंप

वहीं दूसरी तरफ आज जापान में भी बड़ा भूकंप आया है, गुरुवार को आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.9 मापी गई। जापान की मौसम एजेंसी के मुताबिक, भूकंप का असर इतना व्यापक था कि इसके झटके सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित राजधानी टोक्यो तक में महसूस किए गए। हालांकि, इस आपदा में फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और प्रशासन ने सुनामी की चेतावनी भी जारी नहीं की है, जिससे बड़ी राहत मिली है।
मगर दो देशों में एक के बाद एक हुए इन भूकंपों ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि भूकंप होते क्यों हैं?
what are the causes of earthquake explained : क्यों और कैसे कांपती है धरती?

भूवैज्ञानिकों के मुताबिक हमारी पृथ्वी की बाहरी सतह के नीचे मुख्य रूप से सात विशाल टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं। ये प्लेटें स्थिर नहीं हैं, बल्कि बेहद धीमी गति से लगातार घूमती रहती हैं। इस हलचल के दौरान ये प्लेट्स जहां आपस में टकराती हैं, उस संवेदनशील हिस्से को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। जब ये प्लेटें आपस में बार-बार टकराती हैं, तो इनके किनारे मुड़ने लगते हैं और वहां भारी दबाव बनने लगता है।
एक समय ऐसा आता है जब यह दबाव चट्टानों की सहने की क्षमता से बाहर हो जाता है, जिससे वे टूट जाती हैं और अंदर जमा ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजने लगती है। इसी अचानक पैदा होने वाली हलचल या डिस्टर्बेंस को हम भूकंप कहते हैं। इन टेक्टोनिक प्लेटों के घर्षण के कारण ही कई बार ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाएं भी देखने को मिलती हैं।
Earthquake kab Aata Hai? : क्या होती हैं फॉल्ट लाइन्स?

विज्ञान में इन फॉल्ट्स यानी दरारों को उनकी प्रकृति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें मुख्य रूप से नॉर्मल फॉल्ट, थ्रस्ट फॉल्ट, स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट, लेफ्ट लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट और राइट लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट शामिल हैं। इन्हीं दरारों में होने वाले असंतुलन से धरती कांपने लगती है। दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के अलावा हिंद महासागर के कई हिस्से भूकंप के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।
Earthquake Kya Hota Hain : क्या है भूकंप का केंद्र या हाइपोसेंटर?

आम बोलचाल में जिसे हम जमीन का कांपना कहते हैं, वह असल में पृथ्वी के लिथोस्फीयर यानी स्थल मंडल में अचानक ऊर्जा के मुक्त होने से बनने वाली सिस्मिक वेव्स (भूकंपीय तरंगों) का नतीजा है। जमीन के भीतर जिस गहराई पर चट्टानें आपस में टकराती हैं या टूटती हैं, उसे भूकंप का मुख्य केंद्र यानी हाइपोसेंटर कहा जाता है।
हालांकि धरती का डोलना सिर्फ प्राकृतिक वजहों से ही नहीं होता। इंसानी दखल जैसे कि भारी न्यूक्लियर टेस्टिंग, बड़े पैमाने पर होने वाली माइन टेस्टिंग और प्राकृतिक रूप से होने वाले ज्वालामुखी विस्फोट भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।
Earthquake Kya Hota Hain : सिस्मोग्राफ और रिक्टर स्केल का गणित
इस तीव्रता और इसके सटीक समय को मापने के लिए दुनिया भर के भूकंप विज्ञान केंद्र सिस्मोग्राफ नाम के उपकरण का सहारा लेते हैं। वहीं इन तरंगों की ताकत को मापने के लिए जिस पैमाने का इस्तेमाल किया जाता है, उसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल यानी रिक्टर स्केल कहते हैं।
इस स्केल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका हर एक अंक अपने पिछले अंक के मुकाबले दस गुना ज्यादा ताकतवर और विनाशकारी होता है।
तीव्रता के हिसाब से तबाही का पैमाना
इस पैमाने पर तबाही का गणित बेहद साफ है। जब तीव्रता शून्य से 1.9 के बीच होती है, तो इसे सिर्फ सिस्मोग्राफ ही रिकॉर्ड कर पाता है। दो से 2.9 की तीव्रता में बेहद हल्का कंपन महसूस होता है। जब यह पैमाना तीन से 3.9 तक पहुंचता है, तो झटका ऐसा होता है जैसे आपके बिल्कुल करीब से कोई भारी-भरकम ट्रक गुजर गया हो। चार से 4.9 की तीव्रता पर घरों की खिड़कियों के कांच चटकने लगते हैं और दीवारों पर टंगे फ्रेम नीचे गिर जाते हैं।
पांच से 5.9 की श्रेणी में कमरों के भीतर रखा फर्नीचर तक हिल जाता है। छह से 6.9 की तीव्रता बेहद खतरनाक मानी जाती है, जहां मजबूत इमारतों की नींव तक दरक जाती है और ऊपरी मंजिलों को भारी नुकसान पहुंचता है। सात से 7.9 की तीव्रता पर कंक्रीट की इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह जाती हैं और जमीन के नीचे दबी गैस और पानी की पाइपलाइनें फट जाती हैं।
आठ से 8.9 की तीव्रता में बड़े-बड़े पुल और फ्लाईओवर जमींदोज हो जाते हैं। नौ या उससे ऊपर की तीव्रता का मतलब है मुकम्मल तबाही, जहां खुले मैदान में खड़े शख्स को भी धरती लहरों की तरह हिलती दिखेगी और अगर केंद्र समंदर के पास हुआ, तो विनाशकारी सुनामी का आना तय माना जाता है।
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